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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:57 · नई दिल्ली संस्करण

मप्र कैबिनेट की अहम बैठक आज, 4.70 लाख करोड़ का बजट और नई आबकारी नीति को मिल सकती है मंजूरी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मप्र कैबिनेट की अहम बैठक आज, 4.70 लाख करोड़ का बजट और नई आबकारी नीति को मिल सकती है मंजूरी

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. माेहन यादव की अध्यक्षता में आज बुधवार काे होने वाली कैबिनेट बैठक में राज्य के तीसरे वित्तीय बजट और नई आबकारी नीति पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। विधानसभा में पेश किए जाने वाले करीब 4.70 लाख करोड़ रुपए के बजट को पहले कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, इसके बाद वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा सदन में इसे प्रस्तुत करेंगे।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पहले ही वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बजट प्रस्तावों पर चर्चा कर चुके हैं। आज कैबिनेट में औपचारिक अनुमोदन के बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। यह बजट पिछले वित्त वर्ष (2025-26) के 4.21 लाख करोड़ रुपए के बजट से 12 से 15 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है। सरकार 2028 तक राज्य का बजट 7.28 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य भी दोहरा सकती है। खास बात यह है कि यह प्रदेश का पहला ‘पेपरलेस’ बजट होगा—वित्त मंत्री पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह टैबलेट के जरिए बजट पेश करेंगे।तीन साल का रोडमैप और ‘कृषि वर्ष’ पर फोकसबजट के साथ सरकार अगले तीन वर्षों का विकास रोडमैप भी पेश कर सकती है। वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किए जाने के मद्देनजर किसानों के लिए विशेष प्रावधान, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर जोर रहने की संभावना है। इसके अलावा युवाओं के लिए नई सरकारी नौकरियों, महिलाओं और गरीब वर्ग के लिए लक्षित योजनाओं तथा सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान की भी उम्मीद है।नई आबकारी नीति को भी मिल सकती है हरी झंडीकैबिनेट बैठक में 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति को भी मंजूरी मिल सकती है। सरकार शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर ठेके देने की व्यवस्था लागू कर सकती है।एक समूह में 2 से 5 दुकानें शामिल होंगी।प्रदेश में लगभग 1,000 समूह बनाए जाने की संभावना है।राजधानी भोपाल में 25 से 30 समूह बन सकते हैं।टेंडर प्रक्रिया ‘रेंडमाइजेशन सिस्टम’ से होगी, जिसमें कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए तय होगा कि कौन-सा समूह पहले खुलेगा।नई नीति के तहत न तो नई दुकानें खुलेंगी और न ही नए अहाते बनाए जाएंगे। मौजूदा ढांचे के भीतर ही लाइसेंस दिए जाएंगे। होटल-बार लाइसेंस के लिए न्यूनतम कमरों की संख्या 20 से घटाकर 10 किए जाने पर भी विचार हो सकता है।सरकार फिलहाल आबकारी ड्यूटी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। विभाग को 31 मार्च तक लगभग 18 हजार करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना है, जबकि अगले वित्तीय वर्ष में इसमें 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा जा सकता है।

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