संसद का मानसून सत्र: आज लोकसभा में गोवा के लिए अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण विधेयक और मर्चेंट शिपिंग बिल पर होगी चर्चा

संसद का मानसून सत्र: आज लोकसभा में गोवा के लिए अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण विधेयक और मर्चेंट शिपिंग बिल पर होगी चर्चा
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान आज लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने जा रही है, जिनका सीधा प्रभाव देश की राजनीतिक और समुद्री नीति पर पड़ेगा। पहला विधेयक गोवा राज्य में अनुसूचित जनजातियों (ST) को विधानसभा में आरक्षण देने से जुड़ा है, जबकि दूसरा विधेयक देश के समुद्री कानूनों को आधुनिक बनाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने का प्रयास है।
गोवा के लिए अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण विधेयक, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 332 के अंतर्गत गोवा विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का पुनः समायोजन सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान भागीदारी देना है, जो लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे हैं।
दूसरी ओर, 'मर्चेंट शिपिंग बिल, 2024' को केंद्रीय पोत परिवहन, जलमार्ग और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सदन में रखा। यह विधेयक पुराने समुद्री कानूनों को हटाकर एक आधुनिक और व्यापक ढांचा देने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके माध्यम से भारत की मर्चेंट नेवी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियों के अनुरूप लाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ होगी, बल्कि भारतीय शिपिंग उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी।
वहीं, राज्यसभा में आज कोस्टल शिपिंग बिल और कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी बिल पर चर्चा की संभावना है। ये दोनों विधेयक भारत के तटीय व समुद्री व्यापार को कानूनी सुरक्षा और वैश्विक कारोबारी समावेशिता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, संसद के भीतर विपक्ष द्वारा बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। दोनों सदनों में इस मुद्दे पर हंगामा हो रहा है, और कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। सांसदों ने आज भी काले बैंड पहनकर विरोध दर्ज कराया और संसद भवन के मकर द्वार पर प्रदर्शन की योजना बनाई है।
इन विधेयकों के जरिए केंद्र सरकार न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस पहल कर रही है, बल्कि देश की समुद्री अर्थव्यवस्था को भी वैश्विक स्तर पर सशक्त करने की तैयारी में है। यदि ये विधेयक पारित होते हैं, तो यह संसद के मानसून सत्र के सबसे प्रभावशाली और दूरगामी निर्णयों में गिने जाएंगे।





