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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

मोहन यादव बोले- स्लीमनाबाद टनल पांच जिलों के लिए बनेगी अमृतधारा

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
मोहन यादव बोले- स्लीमनाबाद टनल पांच जिलों के लिए बनेगी अमृतधारा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्लीमनाबाद में जल सुरंग टनल का किया निरीक्षणभोपाल।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है। हालांकि कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। लेकिन अब देश की सबसे बड़ी लगभग 12 किलोमीटर लंबी बन रही जल सुरंग स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कटनी जिले के स्लीमनाबाद टनल के अवलोकन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट क्षेत्र और विंध्य की वैली के पांच जिलों कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा।

लोगों के लिए पेयजल की समस्या का समाधान होगा। कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाई जाएगी। यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतीपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है।

किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है।

मां नर्मदा, गंगा बेसिन में भी लाएगी हरियाली मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चत्मकार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होना असंभव जैसा है।

लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ पूरी टीम काम करती रही। राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था। हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है।

किसान कल्याण वर्ष में नर्मदा टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

जमीन न बेचें किसान, बघेलखंड-बुंदेलखण्ड क्षेत्र भविष्य में पंजाब-हरियाणा को पीछे छोड़ेगामुख्यमंत्री ने कहा कि सोन कछार का 152 क्यूबिक डिस्चार्ज से सतना जिले में 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर, मैहर जिले में 54 हजार 227 हेक्टेयर, कटनी जिले में 21 हजार 823 हेक्टेयर, रीवा जिले में 3 हजार 532 हेक्टेयर और पन्ना जिले में 448 हेक्टेयर सहित कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

इसके साथ ही नहरों के निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टनल परियोजना में एक ओर जहां टनल के माध्यम से नर्मदा नदी बहेगी तो दूसरी ओर ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह टनल परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है, जो जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति करेगी।

चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में सिंचाई विभाग ने सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। इस क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक रूप से समृद्धि आएगी। हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष में बड़े-बड़े संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है।

चुनौतियां बढ़ती गईं, इंजीनियर-टेक्निशियन और मजदूर सफलता के लिए संघर्ष करते रहेमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया।

वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई।

इसके बाद चुनौतियां बढ़ती चली गईं, लेकिन इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कार्य में लगे रहे। टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है। टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा।

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