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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:20 · नई दिल्ली संस्करण

कर्मयोगी साधना सप्ताह में मोदी का जोर, तकनीक और AI से बदलेगा प्रशासन

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
कर्मयोगी साधना सप्ताह में मोदी का जोर, तकनीक और AI से बदलेगा प्रशासन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कर्मयोगी साधना सप्ताह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कर्मयोगी साधना सप्ताह के इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 21वीं सदी के इस कालखंड में तेजी से बदलती व्यवस्थाएं, तेजी से बदलती दुनिया और उनके बीच उसी रफ्तार से आगे हमारा भारत आगे बढ़ रहा है। इसके लिए सार्वजनिक को समय के अनुरूप निरंतर अपडेट करना जरूरी है। इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कर्मयोगी साधना सप्ताह उसी प्रयास की एक अहम कड़ी है।"

पीएम मोदी ने कहा, "आप सभी परिचित हैं कि आज शासन के जिस सिद्धांत को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसका मूलमंत्र है 'नागरिक देवो भवः'। इस मंत्र में समाहित भावना के साथ आज पब्लिक सर्विस को ज्यादा काबिल और नागरिकों के लिए ज्यादा संवेदनशील बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। सफलता का एक बड़ा सिद्धांत ये भी है कि दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लकीर बड़ी करो।

हमारे देश में आजादी के बाद से कई तरह की संस्थाएं अलग-अलग उद्देश्य के साथ काम कर रही थीं, लेकिन आवश्यकता थी एक ऐसी संस्था की, जिसका लक्ष्य क्षमता निर्माण हो, जो सरकार में काम करने वाले हर कर्मचारी, हर कर्मयोगी का सामर्थ्य बढ़ाए।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "कर्मयोगी हमारे प्रयासों को नई शक्ति और गति प्रदान कर रहा है। इन प्रयासों के माध्यम से हम सक्षम कर्मयोगियों की एक टीम का निर्माण कर सकेंगे। विकसित भारत के लिए हमें तीव्र आर्थिक विकास की आवश्यकता है।

हमें देश में कुशल कार्यबल तैयार करना होगा। हम सब जानते हैं कि पुरानी व्यवस्था में अधिकारी बनने पर अधिकार पर ही जोर दिया जाता था, लेकिन आज देश में कर्तव्य पर अधिक बल दिया जाता है। हमें हमारे वर्तमान मूल्यों को भविष्य के एक कैनवास पर बड़े पैमाने पर देखना चाहिए। 2047 में विकसित भारत, यही हमारा कैनवास है, यही हमारा लक्ष्य है।"

जब हम सीखने की बात करते हैं, तो आज के समय में टेक्नोलॉजी का महत्व बहुत बढ़ जाता है। हम शासन और वितरण से लेकर अर्थव्यवस्था तक तकनीकी क्रांति की ताकतों को देखते हैं। अब एआई के प्रोसेसर के बाद ये बदलाव और तेजी से होने वाला है।

इसलिए प्रौद्योगिकी को लोड किया गया और उसका उपयोग करना अब सार्वजनिक सेवा का आवश्यक हिस्सा बन गया है। हम प्रगतिशील और पिछड़ी अवस्थाओं की परिभाषा को समाप्त कर रहे हैं। हमें विभिन्न अवस्थाओं के बीच हर प्रकार की खाई को पाटना होगा। हमें अलगाव को तोड़ना होगा।"

अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल के तौर पर क्षमता निर्माण आयोग 2 से 8 अप्रैल 2026 तक 'साधना सप्ताह 2026' की शुरुआत की है।

यह पहल भारत की प्रशासनिक सेवाओं के पूरे तंत्र में क्षमता निर्माण के सबसे बड़े साझा प्रयासों में से एक होगी। यह पहल दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों क्षमता निर्माण आयोग का स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने से मेल खाती है।

साधना सप्ताह का अर्थ है राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूलनीय विकास और मानवीय योग्‍यता को सशक्त बनाना।

यह पहल केन्‍द्रीय मंत्रालयों, विभागों और संगठनों, राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों, तथा 250 से अधिक प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा राष्ट्रीय क्षमता निर्माण प्रयास में एक साथ लाएगी। देश भर के प्रशासनिक अधिकारी क्षमता निर्माण के ऐसे सुनियोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिन्हें 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी दक्षताओं को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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