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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:19 · नई दिल्ली संस्करण

FCRA बिल पर एमके स्टालिन ने केंद्र को घेरा, बोले- अल्पसंख्यक संस्थानों को टारगेट किया जा रहा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
FCRA बिल पर एमके स्टालिन ने केंद्र को घेरा, बोले- अल्पसंख्यक संस्थानों को टारगेट किया जा रहा

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से विदेशी अंशदान (विनियमन) ढांचे में प्रस्तावित संशोधनों को तुरंत वापस लेने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का मकसद ईसाई संस्थानों, चर्चों और अल्पसंख्यकों की ओर से चलाए जा रहे अन्य धार्मिक संगठनों को अनुचित रूप से निशाना बनाना है।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की।

स्टालिन ने अपने पोस्ट में लिखा, "मैं केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से प्रस्तावित 'विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक-2026' की कड़ी निंदा करता हूं, जो ईसाई एनजीओ, चर्चों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों पर सीधा हमला है।"

वक्फ संपत्तियों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों से तुलना करते हुए, उन्होंने सरकार पर अलग-अलग धर्मों से जुड़े संस्थानों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

उन्होंने लिखा, "वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिशों के बाद अब केंद्र की भाजपा सरकार अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए विदेशी फंडिंग को रोकने की दिशा में आगे बढ़ रही है।"

इसी बीच, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी देते हुए 'एक्स' पोस्ट में कहा, "विपक्ष के विरोध और केरल में होने वाले आगामी चुनावों, जहां बड़ी संख्या में ईसाई रहते हैं, के कारण फिलहाल पीछे हटने के बावजूद संसद के एक विशेष सत्र में एफसीआरए को पारित कराने की स्पष्ट योजनाएं हैं।

उन्होंने मांग की कि इस अन्यायपूर्ण और मनमानी बिल को पूरी तरह से वापस लिया जाना चाहिए। एमके स्टालिन ने लिखा, "मैं देश के प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वे तत्काल कार्रवाई करें।"

आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की उम्मीद है। संभावना है कि विपक्षी दल केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और इसे धार्मिक स्वतंत्रता व संस्थागत स्वायत्तता से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बनाकर पेश करेंगे।

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