ऑपरेशन सिंदूर के कारण छूटे एग्ज़ाम? दिल्ली विश्वविद्यालय देगा दोबारा मौका

छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में डीयू का मानवीय और संवेदनशील निर्णय
नई दिल्ली, 01 जुलाई 2025।
देश की राजधानी दिल्ली में जब 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे थे, तब कई विद्यार्थी ऐसे भी थे जो विभिन्न कारणों से विश्वविद्यालय परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पाए। इन परिस्थितियों को समझते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने एक अत्यंत सकारात्मक और छात्र-हितैषी कदम उठाया है।
डीयू प्रशासन ने घोषणा की है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन विद्यार्थियों की परीक्षा छूट गई थी, उन्हें अब दोबारा परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया जाएगा। यह विशेष परीक्षा 13 मई, 14 मई और 15 मई 2025 की उन परीक्षाओं के लिए आयोजित की जाएगी, जिनमें छात्र ‘अनिवार्य परिस्थितियों’ के कारण उपस्थित नहीं हो सके थे।
इस निर्णय की जानकारी देते हुए परीक्षा नियंत्रक प्रो. गुरप्रीत सिंह टुटेजा ने बताया कि यह निर्णय छात्रों के व्यापक हित में लिया गया है। उन्होंने कहा,
“देशहित में चल रहे अभियान के समय कुछ छात्र दिल्ली से बाहर थे या प्रभावित इलाकों में फँसे हुए थे, जिससे वे निर्धारित तिथियों की परीक्षा नहीं दे सके। विश्वविद्यालय ने उनकी कठिनाइयों को समझते हुए यह व्यवस्था की है, ताकि किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र बर्बाद न हो।”
आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?
जिन छात्रों की परीक्षा छूट गई है, उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा जारी गूगल फॉर्म भरना होगा, जो निम्न लिंक पर उपलब्ध है:
🔗 https://forms.gle/zkWJxTQiVf73ft7j6
यह फॉर्म केवल उन्हीं छात्रों के लिए है जो 13.05.2025, 14.05.2025 या 15.05.2025 को परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सके थे।
फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 10 जुलाई 2025 (गुरुवार) रात 11:59 बजे तक है।
छात्रों को यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करना होगा कि वे उस समय दिल्ली में नहीं उपस्थित हो सके थे — इसके लिए उन्हें दस्तावेज़ी साक्ष्य (जैसे ट्रैवल टिकट, पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट या अन्य उपयुक्त दस्तावेज़) अपलोड करना आवश्यक होगा।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फैसले से न सिर्फ हजारों छात्रों का अकादमिक वर्ष बच सकता है, बल्कि यह कदम यह भी दर्शाता है कि एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था केवल परीक्षा संचालन में ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों और छात्रों की मानसिक अवस्था को समझने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय घटनाक्रमों के दौरान, जब जनजीवन प्रभावित होता है, तो कई बार शैक्षणिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में DU द्वारा लिया गया यह निर्णय यह सिद्ध करता है कि शिक्षा व्यवस्था मानवीय दृष्टिकोण और लचीलेपन के साथ भी कार्य कर सकती है।
क्या है छात्रों की प्रतिक्रिया?
छात्र समुदाय ने इस फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा है कि यह निर्णय उम्मीद की एक किरण है। कई विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए हैं कि किस प्रकार वे ऑपरेशन सिंदूर के कारण शहर में नहीं रह पाए और परीक्षा छूट गई। अब उन्हें अपनी पढ़ाई और भविष्य को पुनः पटरी पर लाने का अवसर मिला है।
📌 नोट: यह विशेष परीक्षा केवल उन्हीं छात्रों के लिए है जो निर्धारित तीन तिथियों की परीक्षा में उपस्थिति दर्ज नहीं कर सके थे और जो उपयुक्त प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हैं।





