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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:32 · नई दिल्ली संस्करण

मध्य प्रदेश में नाबालिग बनी मां, बच्चे को दिया जन्म, आरोपी गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
मध्य प्रदेश में नाबालिग बनी मां, बच्चे को दिया जन्म, आरोपी गिरफ्तार

भोपाल/बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर विकासखंड के परसमऊ गांव में स्थित एक छात्रावास में रहने वाली 13 वर्षीय लड़की ने इस सप्ताह जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में एक बच्ची को जन्म दिया।

इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की लड़कियों के लिए बनाए गए आवासीय छात्रावासों में सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी और देखरेख में गंभीर लापरवाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कक्षा 8 में पढ़ने वाली छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर उसे गढ़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल जांच में पता चला कि वह काफी समय से गर्भवती थी, जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और महिला पुलिस थाने ने कार्रवाई शुरू की।

बाद में जांच गढ़ी पुलिस थाने को सौंप दी गई, क्योंकि छात्रावास उसी क्षेत्र में आता है। महिला पुलिस थाने की प्रभारी किरण वरकड़े ने आईएएनएस को बताया कि अस्पताल की रिपोर्ट मिलते ही कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जो घटना के समय नाबालिग था और अब 18 साल का हो चुका है। उसे शनिवार को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।

पीड़िता ने आरोपी की पहचान अपने गांव के निवासी के रूप में की है। अधिकारी पूरी संवेदनशीलता के साथ और नाबालिगों से जुड़े कानूनी नियमों के तहत घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।

गर्भावस्था का इतने समय तक पता न चल पाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। बताया गया है कि लड़की की मां ने भी उसके शरीर में हो रहे बदलावों पर ध्यान नहीं दिया। वहीं, छात्रावास की वार्डन ने पुलिस को बताया कि अप्रैल की छुट्टियों में छात्रा घर गई थी और माना जा रहा है कि घटना उसी दौरान हुई।

जांच अधिकारी के अनुसार, बाहर से दिखाई देने वाले किसी भी लक्षण के बावजूद कोई संदेह नहीं जताया गया। इस पर कार्रवाई करते हुए आदिवासी कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शंकुतला डामोर ने छात्रावास अधीक्षिका को गंभीर लापरवाही के आरोप में तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी किया।

आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि छात्रावास वार्डन ने छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही उसकी अलग से मेडिकल जांच करवाई।

इसके अलावा, छात्रा की बार-बार अनुपस्थिति के बावजूद उसके माता-पिता से उसकी गैरहाजिरी या स्वास्थ्य को लेकर कोई संपर्क नहीं किया गया।

यह दर्शाता है कि सरकारी प्राथमिक विद्यालय में प्राथमिक शिक्षिका और छात्रावास की वार्डन ने अपने छात्रावास प्रबंधन के कर्तव्यों का पालन नहीं किया और अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन में मनमानी व गंभीर लापरवाही बरती।

जांच में यह भी पुष्टि हुई कि छात्रा के गिरते स्वास्थ्य के स्पष्ट संकेतों को नजरअंदाज किया गया। कोई विशेष मेडिकल जांच नहीं करवाई गई और उसकी लगातार बीमारी या बार-बार अनुपस्थिति की जानकारी समय पर माता-पिता को नहीं दी गई।

पुलिस अधिकारी मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।

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