बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन में बड़ा खुलासा: सैकड़ों विदेशी नागरिकों की पहचान, आयोग सख्त जांच के मूड में

बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन में बड़ा खुलासा: सैकड़ों विदेशी नागरिकों की पहचान, आयोग सख्त जांच के मूड में
पटना, 14 जुलाई 2025 : बिहार में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। चुनाव आयोग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि सैकड़ों की संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, जो राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ये विदेशी नागरिक लंबे समय से बिहार में निवास कर रहे हैं और उन्होंने आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, राशन कार्ड जैसे भारतीय पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा लिया है।
चुनाव आयोग अब इस पर बेहद गंभीर रुख अपना चुका है। 1 अगस्त से 30 अगस्त 2025 तक विशेष अभियान के तहत इन सभी संदिग्ध विदेशी नागरिकों की गहन जांच की जाएगी। यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि वे भारत के नागरिक नहीं हैं, तो उनके नाम मतदाता सूची से तुरंत हटा दिए जाएंगे। आयोग का यह भी कहना है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की राजनीतिक दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संविधान सम्मत होगी।
यह खुलासा न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक चेतावनी है। अगर मतदाता सूची में विदेशी नागरिक शामिल हो जाते हैं, तो यह न केवल चुनावों की शुचिता को प्रभावित करता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह गंभीर विषय अब राजनीति का केंद्र बन सकता है। कई विपक्षी दलों द्वारा इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक कदम मान रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही SIR प्रक्रिया को वैध और आवश्यक करार दे चुका है।
आम जनता के लिए यह आवश्यक है कि वे इस प्रक्रिया को समर्थन दें और अपने-अपने क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी आयोग या प्रशासन को दें। एक सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया ही लोकतंत्र की असली पहचान होती है , और इसके लिए नागरिकों की जागरूकता और भागीदारी सबसे बड़ा हथियार है।
बिहार में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए यह मुहिम न केवल समय की मांग है, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक साहसिक कदम भी है।





