मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:35 · नई दिल्ली संस्करण

रोहतास में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा!,26 एकड़ संपत्ति हड़पने का आरोप

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
रोहतास में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा!,26 एकड़ संपत्ति हड़पने का आरोप

- लोक अदालत ने पहले ही जालसाजी पकड़ी, फिर भी रिकॉर्ड से गायब हुई बहनों की जमीन

रोहतास। बिहार में उपमुख्यमंत्री- सह राजस्व मंत्री विजय सिन्हा की कोशिशों को उनके ही विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पलिता लगा रहे हैं। ताजा मामला रोहतास जिले के कोचस अंचल से जुड़ा है, जहां जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक रोहतास जिले के कोचस प्रखंड अन्तर्गत ग्राम सरेयां में करीब 26 एकड़ पुश्तैनी संपत्ति को कथित साजिश के तहत राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ कर एक महिला और उसके बेटों के नाम दर्ज करा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है। एक ही जमीन पर बार-बार जालसाजी, अदालत की टिप्पणी के बाद भी दोबारा खेल और अब सरकारी रिकॉर्ड का गायब होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्राम सरेयां निवासी रजनीकांत तिवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्व मारकण्डेय तिवारी की मौत के बाद उनकी संपत्ति पर उनकी पत्नी और तीनों बेटियों का बराबर हक था। विधिवत दाखिल-खारिज के बाद वर्षों तक चारों के नाम से मालगुजारी रसीद भी कटती रही।

शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2011 में पदमावती मिश्रा ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए लोक अदालत सासाराम से पूरी संपत्ति अपने नाम कराने की कोशिश की थी। लेकिन, मामला खुलने पर 16 मार्च 2012 को लोक अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए डिग्री रद्द कर दी थी और कहा था कि अदालत को गुमराह कर आदेश हासिल किया गया।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि अदालत द्वारा जालसाजी उजागर होने के बावजूद उसी जमीन को दोबारा राजस्व अभिलेखों में बदल दिया गया। आरोप है कि पदमावती मिश्रा ने अपने बेटों निखिल और राहुल के साथ मिलकर 26 एकड़ में से 19 एकड़ 23 डिसमिल जमीन बेटों के नाम और शेष 6 एकड़ 78 डिसमिल अपने नाम दर्ज करा ली। इस प्रक्रिया में बाकी दो बहनों का नाम पूरी तरह से रिकॉर्ड से हटा दिया गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी।

म्यूटेशन फाइल ‘गायब’, आरटीआई का जवाब भी नहीं- क्या छुपाया जा रहा है?

मामले को और संदिग्ध बनाता है म्यूटेशन केस संख्या 455/16-17, जिसके आधार पर जमीन ट्रांसफर होने की बात कही जा रही है। जब इसकी नकल मांगी गई तो अंचल कार्यालय ने लिखित में जवाब दिया कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी भी तीन महीने बाद तक नहीं दी गई। जबकि कानूनन 30 दिन में जवाब देना अनिवार्य है। इससे पूरे मामले में पर्दा डालने की आशंका और गहरा गई है।

खरीदार भी फंसे, म्यूटेशन पर रोकमामले का असर अब तीसरे पक्ष पर भी पड़ा है। बड़ी बहन आशा पाण्डेय द्वारा बेची गई जमीन के खरीदारों का म्यूटेशन भी अटका हुआ है। इससे वे कानूनी और आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें