दिल्ली में लेबर लॉ में बड़ा बदलाव: अब महिलाएं कर सकेंगी नाइट शिफ्ट, 200 कर्मचारियों तक छंटनी के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं

दिल्ली में लेबर लॉ में बड़ा बदलाव: अब महिलाएं कर सकेंगी नाइट शिफ्ट, 200 कर्मचारियों तक छंटनी के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं
नई दिल्ली, 3 जुलाई 2025: दिल्ली सरकार ने राज्य में श्रम कानूनों (लेबर लॉ) में व्यापक बदलाव की घोषणा की है, जो न केवल महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अधिक अवसर देंगे बल्कि उद्योगों के लिए भी कारोबार करना आसान बनाएंगे। यह बदलाव दिल्ली को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
महिलाएं अब कर सकेंगी नाइट शिफ्ट में काम
नए प्रावधानों के तहत, अब महिलाएं अपनी सहमति से फैक्ट्रियों और अन्य प्रतिष्ठानों में रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम कर सकेंगी। इसके लिए फैक्ट्री मालिकों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध करने होंगे। इनमें सुरक्षित आवागमन, शौचालय, पेयजल, सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही यौन उत्पीड़न से सुरक्षा (POSH कानून) का सख्ती से पालन करना होगा।
अब दुकान और प्रतिष्ठानों के लिए न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या 10 होगी
दिल्ली दुकान और स्थापना अधिनियम (Delhi Shops and Establishment Act) में संशोधन करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब केवल उन्हीं प्रतिष्ठानों पर यह अधिनियम लागू होगा जहां कम से कम 10 कर्मचारी कार्यरत हों। इससे सूक्ष्म इकाइयों को कानूनी जटिलताओं से राहत मिलेगी। साथ ही, सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को अब सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे खुला रखने की अनुमति भी दे दी गई है।
अब 200 कर्मचारियों तक की कंपनियों को छंटनी के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं
औद्योगिक विवाद अधिनियम (Industrial Dispute Act) में किए गए संशोधन के तहत अब 200 या उससे कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी, बंद करने या कर्मचारियों को हटाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों की थी। यह फैसला खासकर छोटे और मझौले उद्योगों के लिए परिचालन को सरल और लचीला बनाएगा।
कर्मचारियों को मिलेगा कानूनी संरक्षण और मुआवजे का अधिकार
हालांकि सरकार ने छंटनी की प्रक्रिया को आसान बनाया है, लेकिन श्रमिकों को अभी भी लेबर कोर्ट में न्याय पाने का अधिकार मिलेगा। किसी भी अनुचित छंटनी या सेवा शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में कर्मचारी न्यायालय में अपील कर सकेंगे।
श्रमिक संगठनों ने उठाए सवाल
इन बदलावों पर श्रमिक संगठनों ने चिंता जताई है। श्रमिक विकास संगठन के महासचिव कृष्णा यादव ने कहा कि सरकार को केवल उद्योगपतियों की नहीं, बल्कि श्रमिकों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों के लिए मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था की जाए और लेबर कोर्ट में मामलों का शीघ्र निपटारा हो।
दिल्ली सरकार द्वारा लाए गए ये श्रम सुधार एक ओर जहां महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देंगे, वहीं दूसरी ओर श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। यदि इन नीतियों का उचित क्रियान्वयन और निगरानी की जाए, तो यह कदम दिल्ली को औद्योगिक प्रगति और सामाजिक संतुलन की दिशा में एक नई ऊंचाई तक ले जा सकता है।





