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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

ग्वालियर को बड़ी सौगात, देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए आज होगा एमओयू

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
ग्वालियर को बड़ी सौगात, देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए आज होगा एमओयू

भोपाल। मध्य प्रदेश को उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल होने जा रही है। केंद्रीय संचार मंत्रालय एवं दूरसंचार विभाग की महत्वाकांक्षी पहल के तहत ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन स्थापित किया जा रहा है।

जनसम्पर्क अधिकारी बबीता मिश्रा ने बताया कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) और मध्य प्रदेश शासन के उद्योग विभाग के बीच आज गुरुवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, लगभग 350 एकड़ में विकसित होने वाला यह अत्याधुनिक प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर मोबाइल उपकरण, नेटवर्क इक्विपमेंट, ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर तथा 5जी और 6जी अनुसंधान एवं विकास सहित दूरसंचार क्षेत्र की सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला को एक ही परिसर में विकसित करेगा। इस परियोजना के प्रथम चरण के लिए केंद्र सरकार ने 493 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत केंद्रीय अनुदान स्वीकृत किया है। वहीं राज्य सरकार द्वारा सडा क्षेत्र में 100 एकड़ तथा ग्वालियर आईटी पार्क में 70 एकड़, कुल 170 एकड़ भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 596 करोड़ रुपये है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन प्रयोगशालाएं, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, आधुनिक भण्डारण, सड़क तथा आईसीटी जैसी साझा अधोसंरचना भी विकसित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से आगामी वर्षों में लगभग 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है तथा लगभग 5 हजार प्रत्यक्ष कुशल रोजगार सृजित होंगे। इनमें से करीब 3,500 रोजगार प्रथम चरण में ही उपलब्ध होने का अनुमान है।

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, यह परियोजना राउटर, एंटीना, ऑप्टिकल फाइबर, चिप तथा अन्य दूरसंचार उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करेगी और निर्यात को नई गति प्रदान करेगी। परियोजना में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल, तेजस नेटवर्क्स, वीवीडीएन तथा सिरमा एसजीएस जैसी अग्रणी दूरसंचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां एंकर निवेशक के रूप में जुड़ रही हैं।

प्रारंभिक प्रतिबद्धताओं के अनुसार, प्रथम चरण में 150 से 200 एकड़ क्षेत्र में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। परियोजना का संचालन विशेष प्रयोजन कंपनी के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें मध्य प्रदेश शासन की 51 प्रतिशत तथा दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत भागीदारी होगी।

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन को देश के सबसे आकर्षक औद्योगिक निवेश स्थलों में विकसित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज भी उपलब्ध कराया गया है। इसके अंतर्गत पात्र स्थिर पूंजी निवेश पर अधिकतम 200 करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत पूंजी अनुदान, मेगा परियोजनाओं के लिए रोजगार सृजन सहायता, प्रत्येक नए कर्मचारी के कौशल विकास पर वित्तीय सहायता, मात्र एक रुपये प्रीमियम पर भूमि आवंटन तथा 30 वर्षों तक नाममात्र की लीज दर का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही स्टाम्प ड्यूटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति, प्रारंभिक पांच वर्षों तक विद्युत टैरिफ में प्रति यूनिट रु. 2 की छूट, मालभाड़ा सब्सिडी, अनुसंधान एवं विकास सहायता, पेटेंट एवं बौद्धिक संपदा व्यय की प्रतिपूर्ति तथा हरित औद्योगीकरण को बढ़ावा देने वाले विशेष प्रोत्साहन भी प्रदान किए जाएंगे।

जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन तथा टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी राष्ट्रीय पहलों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अनुसंधान से लेकर कंपोनेंट निर्माण और अंतिम उत्पाद निर्माण तक की सम्पूर्ण शृंखला को एकीकृत करेगी। साथ ही एमएसएमई, स्टार्टअप्स और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को बड़े उद्योगों के साथ विकसित होने का अवसर मिलेगा, जिससे देश की दूरसंचार सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।

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