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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

महाराष्ट्र: 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' विधेयक विधानसभा से पास, विधान परिषद में आज बिल पर चर्चा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
महाराष्ट्र: 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' विधेयक विधानसभा से पास, विधान परिषद में आज बिल पर चर्चा

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार देर रात तगड़ी बहस के बाद धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 पारित किया गया। सत्तारूढ़ महायुति सरकार ने गैरकानूनी और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विधेयक की जरूरत पर जोर दिया। शिवसेना (यूबीटी) ने भी इस विधेयक का समर्थन किया। जिससे महा विकास अघाड़ी में मतभेद दिखाई दिया। कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और समाजवादी पार्टी सहित अन्य सहयोगी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया।

बता दें कि विधेयक में सामान्य मामलों में 7 साल तक की जेल और 1-5 लाख रुपये जुर्माना,महिला/नाबालिग/एसी-एसटी मामलों में 10 साल तक जेल और 7 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा, और बाद में घोषणा भी। अवैध धर्मांतरण से हुई शादी निरस्त मानी जा सकती है।

विधानसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक पारित करने के लिए विधान परिषद को भेजा गया है। मंगलवार को विधान परिषद में इस पर चर्चा है।

विधानसभा में चर्चा के दौरान सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी खास वर्ग के खिलाफ नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसे केवल जबरदस्ती, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सरकार के रुख को स्पष्ट किया।

'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' नाम का यह विधेयक शुक्रवार को गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) डॉ. पंकज भोयर ने सदन में पेश किया। जिसका उद्देश्य प्रलोभन, छल या बल के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाना है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से ही लागू हैं। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र ने भी ऐसा ही कानून लागू करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। सभी को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार।

हालांकि, किसी को जबरदस्ती धर्मांतरित करना, धोखाधड़ी, दबाव, बल प्रयोग या प्रलोभन देना स्वतः ही गलत है, इसलिए ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह कानून आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्हें धर्म परिवर्तन के बारे में अधिकृत अधिकारियों को सूचित करना होगा। सक्षम अधिकारी स्वीकृति देने से पहले यह सत्यापित करेंगे कि धर्म परिवर्तन वास्तव में स्वैच्छिक है।

इस विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के भास्कर जाधव ने कहा कि इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना और अवैध धर्मांतरण को रोकना है। यह व्यापक है और अफवाहों या गलतफहमियों के बावजूद किसी विशेष धर्म को निशाना नहीं बनाता है। इसका उद्देश्य अनैतिक प्रथाओं और धर्म के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

जाधव ने कहा कि मीडिया में झूठे दावे किए जा रहे हैं कि यह विधेयक किसी विशेष धर्म को निशाना बनाता है; यह गलत है।

यह विधेयक सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है, और इसका उद्देश्य धर्मांतरण में जबरदस्ती या प्रलोभन को रोकना है।

बहस के दौरान, एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 पर बोलते हुए विधानसभा में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अपने भाषण में, आव्हाड ने विभिन्न ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला दिया। हालांकि, जब उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का विशेष रूप से उल्लेख किया, तो सदन में हंगामा मच गया। अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने आव्हाड से खेद व्यक्त करने का निर्देश दिया। जिसके बाद उन्होंने ने सदन से माफी मांगी।

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