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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

महाराष्ट्र सरकार पेश करेगी विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
महाराष्ट्र सरकार पेश करेगी विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार शुक्रवार को विधानसभा में 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश करने जा रही है। इसके साथ ही, 'जबरन' धर्मांतरण के पीछे शामिल व्यक्तियों और संगठित संस्थाओं की पहचान करने और उन्हें दंडित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी या लालच देकर कराए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरणों पर रोक लगाना है। 5 मार्च को हुई बैठक में राज्य कैबिनेट ने एक उच्च-स्तरीय विशेष समिति की सिफारिशों के बाद इसे मंजूरी दे दी थी।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता वाली इस समिति का गठन 14 फरवरी, 2025 को किया गया था। इसका उद्देश्य कानूनी ढांचों का अध्ययन करना और अवैध धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतों से निपटने के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार करना था।

एक बार जब बिल को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों से मंजूरी मिल जाएगी, तो इसे राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा जाएगा।

राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।

महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय की ओर से जारी एजेंडा में प्रश्नकाल के बाद राज्य विधानसभा में इस बिल को पेश करने की बात कही गई है।

इस बिल में सख्त प्रशासनिक शर्तें और आपराधिक दंड का प्रस्ताव रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्म परिवर्तन जबरदस्ती नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद का मामला हो।

इस बिल के अनुसार, जो लोग धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें जिला अधिकारियों को 60 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी।

धर्म परिवर्तन के बाद, इसे कानूनी रूप से वैध माने जाने के लिए 25 दिनों के भीतर आधिकारिक तौर पर पंजीकृत करवाना जरूरी होगा।

इसके अलावा, बिल में यह प्रस्ताव किया गया है कि जिस व्यक्ति का धर्म परिवर्तन हो रहा है, उसके खून के रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अगर उन्हें शक हो कि इस प्रक्रिया में जबरदस्ती या कोई लालच शामिल है।

सरकार का कहना है कि यह कानून कमजोर लोगों को धर्म परिवर्तन की गलत चालों से बचाने के लिए जरूरी है।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे सहित अन्य मंत्रियों ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून के प्रबल समर्थक रहे हैं। यह कानून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में देखे गए एक चलन का ही अनुसरण करता है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के "धर्म की स्वतंत्रता" संबंधी कानून बनाए हैं।

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