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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ मध्य प्रदेश, आधी रात मंदिरों में गूंजे जयकारे

भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार की रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम, उत्साह और भक्तिभाव से मनाया गया गया।

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जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ मध्य प्रदेश, आधी रात मंदिरों में गूंजे जयकारे

भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार की रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम, उत्साह और भक्तिभाव से मनाया गया गया। रात के 12 बजते ही प्रदेशभर में ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज उठे।

भोपाल, उज्जैन, इंदौर, समेत प्रदेशभर के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने आरती की, कान्हा को पालना झुलाया और प्रसाद चढ़ाया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर भोपाल के पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुत भजन भी सुने।

उज्जैन के राम मंदिर में रात 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने कान्हा के जन्म की खुशियां मनाईं। मंदिर परिसर में आतिशबाजी भी की गई। वहीं इस्कॉन मंदिर में बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन के बीच भक्त कृष्ण भक्ति में झूमते नजर आए।

इंदौर के राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर और बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। बांके बिहारी मंदिर में राजकमल बैंड ने भजनों की प्रस्तुति दी। बड़ा गणपति मंदिर पर युवाओं की टोली ने करीब 30 फीट ऊंची मटकी फोड़ी। कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे।

रतलाम के धानमंडी चौराहे पर क्रेन से दही-हांडी बांधी गई। महाराष्ट्र की ढोल-ताशा टीम की प्रस्तुति ने माहौल में उत्साह भर दिया। बड़ा गोपाल जी मंदिर में कान्हा का विशेष श्रृंगार किया गया और भक्त जयकारे लगाते हुए झूमे। खंडवा शहर में चार स्थानों पर मटकी फोड़ आयोजन हुए। भिंड में मंदिरों के साथ खंडा रोड पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। ओंकारेश्वर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक और श्रृंगार किया गया। जन्म के मौके पर मंदिरों में आरती और धार्मिक अनुष्ठान हुए।

ग्वालियर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी गोपाल मंदिर में अभिषेक के बाद भगवान की आरती और पूजा-अर्चना की गई। गोपाल मंदिर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। दर्शन कर लौटे भक्तों ने कहा कि भगवान के बहुत अच्छे दर्शन हुए, मन प्रसन्न हो गया। इंदौर में राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरती हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।

भगवान श्रीकृष्ण ने कष्टों के बीच रहकर भी जीवन को सार्थक बनाने की दी सीख : मुख्यमंत्री

इधर, भोपाल के भोपाल के पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर आयोजित श्रीकृष्ण जन्म उत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कष्टों के बीच जीवन को किस तरह सार्थक बनाया जा सकता है, यह भगवान श्रीकृष्ण से सीखा जा सकता है। उन्होंने कंस को जो एक सत्ताधीश थे, उनके घर में ही घुसकर मार कर साहस और शौर्य का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन और ग्रामीण क्षेत्रों में वृंदावन ग्राम प्रारंभ किये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं के संचालन के लिए सहायता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि घर-घर गोपाल की कल्पना को साकार करते हुए प्रदेश में गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आने वाले समय में मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में देश में नंबर वन बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस्कॉन मंदिर में आकर वृंदावन की भांति महसूस होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन काल में मित्रता के महत्व को भी स्थापित किया। साथ ही शिक्षा की महत्ता स्थापित की। उन्होंने उज्जैन में गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की। अपने जीवन में ही जगतगुरु की उपाधि भी उन्होंने प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल की गई। संविधान की दृष्टि से सभी नागरिक समान हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। प्रारंभ में संस्था द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर नमन कर पूजा अर्चना की। उन्होंने इस्कॉन संस्था के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की प्रतिमा को भी नमन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए इस्कॉन मंदिर निर्माण की कल्पना की सराहना की। उन्होंने बताया कि जब वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे तो सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में उज्जैन में ही इस्कॉन मंदिर प्रारंभ हुआ।

यह सिलसिला राजधानी भोपाल तक पहुंचा है। यहां निर्मित किये जा रहे नए मंदिर की वास्तुकला और नागर शैली के अनुरूप निर्माण की पहल प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए इस्कॉन मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस्कॉन संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

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