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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:19 · नई दिल्ली संस्करण

मध्य प्रदेश ने समान नागरिक संहिता की व्यवहार्यता की जांच के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मध्य प्रदेश ने समान नागरिक संहिता की व्यवहार्यता की जांच के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' (यूसीसी) को लागू करने की व्यवहार्यता की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।

विधि और विधायी कार्य विभाग की ओर से घोषित इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में विभिन्न समुदायों की ओर से वर्तमान में पालन किए जा रहे विविध व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों में एकरूपता लाना है। इस संबंध में सोमवार को एक आदेश जारी किया गया।

मौजूदा वक्त में, विवाह, विरासत, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों के लिए विभिन्न समुदायों में अलग-अलग प्रावधान लागू हैं।

नवगठित समिति इन विभिन्नताओं का अध्ययन करेगी और एक ऐसा ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करेगी जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना हो।

इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रसाद देसाई करेंगी। अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग में अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।

अपनी जिम्मेदारियों के तहत, यह समिति उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों की ओर से अपनाए गए मॉडलों की जांच करेगी, साथ ही मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को भी ध्यान में रखेगी। यह जनता, धार्मिक और सामाजिक संगठनों, तथा विषय विशेषज्ञों से भी सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगी।

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर, तथा 'लिव-इन रिलेशनशिप' के विनियमन जैसे समकालीन मुद्दों को संबोधित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

समिति को निर्देश दिया गया है कि वह 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट, साथ ही एक मसौदा विधेयक, पेश करे। सरकार ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भविष्य की कानूनी जटिलताओं को कम करना और एक अधिक सुसंगत नागरिक ढांचे की ओर आगे बढ़ना है।

सचिव मुकेश कुमार की ओर से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित इस आदेश के साथ ही, यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। पर्यवेक्षक इस कदम को राज्य में कानूनी एकरूपता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया एक कदम मान रहे हैं।

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