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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:36 · नई दिल्ली संस्करण

लोकसभा चुनाव-2024 में नक्सल होगी बड़ी चुनौती! माओवादी, टीएसपीसी और जेजेएमपी का दस्ता हुए सक्रिय,दे सकते हैं बड़ी घटना को अंजाम

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
लोकसभा चुनाव-2024 में नक्सल होगी बड़ी चुनौती! माओवादी, टीएसपीसी और जेजेएमपी का दस्ता हुए सक्रिय,दे सकते हैं बड़ी घटना को अंजाम

लोकसभा चुनाव-2024 में नक्सल होगी बड़ी चुनौती! माओवादी, टीएसपीसी और जेजेएमपी का दस्ता हुए सक्रिय,दे सकते हैं बड़ी घटना को अंजाम

रांची: लोकसभा चुनाव में नक्सल समस्या बड़ी चुनौती होगी। बिहार, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ सीमा पर लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सली हिंसा से निबटना बड़ी चुनौती रही है। माओवादियों की सक्रियता के लिहाज से झारखंड के आठ जिले अति माओवाद प्रभाव श्रेणी में हैं। 16 जिलों में माओवादियों का सिर्फ प्रभाव है। झारखंड के चतरा, गिरिडीह, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम अति माओवाद की श्रेणी में शामिल हैं। वहीं 16 जिलों में रांची, खूंटी, बोकारो, चतरा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम माओवाद प्रभाव वाला में शामिल हैं। पलामू लोकसभा क्षेत्र में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी, तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमिटी (टीएसपीसी) और झारखंड जनमुक्ति परिषद (जेजेएमपी) का दस्ता सक्रिय है। कभी नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना रहा बूढापहाड और छकरबंधा का इलाका पलामू लोकसभा क्षेत्र में ही है। छकरबंधा से सटे हुए बिहार के इलाके में माओवादी और टीएसपीसी, बूढ़ापहाड़ से सटे हुए इलाके में माओवादी, जबकि आन्तरिक हिस्से में टीएसपीसी और जेजेएमपी सक्रिय है।

39 बड़े नक्सली ऐसे हैं जो चुनाव के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं, जिसमें प्रयाग मांझी, मिसिर बेसरा, पतिराम मांझी और असीम मंडल का नाम शामिल है। मिसिर बेसरा को छोड़कर सभी माओवादियों की सेंट्रल कमेटी के मेंबर हैं। मिसिर बेसरा पोलित ब्यूरो मेंबर है। इसके अलावा अनुज, ब्रजेश गंझू, चमन उर्फ लंबू, लालचंद्र हेंब्रम, रघुनाथ हेंब्रम, अजय महतो और प्रकाश महतो भी हिंसा फैलाने की फिराक में हैं। टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू को छोड़कर सभी भाकपा माओवादी संगठन के सैक सदस्य हैं। रिजनल कमिटी के मेंबर मेहनत, रणविजय महतो, छोटू खेरवार, मार्टिन केरकेट्टा, आक्रमण गंझू, रामप्रसाद मारडी, नितेश यादव, रविंद्र गंझू, अमित मुंडा, बेला सरकार, गणेश भारती, पूनम और मदन महतो हिंसक घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं जोनल कमिटी के मेंबर मनोहर परहिया, आरिफ, रामदयाल महतो, मृत्युंजय जी, अरविंद भुइयां, पप्पू लोहरा, मनोहर गंझु, नीरज सिंह खेरवार, साहेबराम मांझी, विवेक यादव, सीताराम रजवार और गोदराय यादव का भी नाम इसमें शामिल है। पलामू में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़े नक्सल हमले हो चुके हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बार पलामू के इलाके से ही लैंड माइंस का इस्तेमाल शुरू किया था। उसके बाद से नक्सली चुनाव में कई बड़े हमले कर चुके हैं। दो दशक में 14 से अधिक जवान शहीद हुए हैं। जिसमें डीएसपी, थाना प्रभारी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी हमलों में लैंड माइंस का इस्तेमाल हुआ है। इस दौरान माओवादियों ने तीन दर्जन से भी अधिक सरकारी भवनों को विस्फोट कर नष्ट कर दिया है। 2019 के चुनाव में माओवादियों ने पलामू के पिपरा बाजार में सरे आम प्रखंड प्रमुख को गोलियों से भून दिया था जबकि लोकसभा चुनाव में भाजपा के कार्यालय को उड़ा दिया था। पलामू लोकसभा क्षेत्र में करीब 2426 मतदान केंद्र, जिन में 388 मतदान केंद्र अति नक्सल प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं। जबकि 847 से अधिक मतदान केंद्र संवेदनशील की श्रेणी में हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पलामू के इलाके में 40 से भी अधिक केंद्रीय बलों की कंपनियों की तैनाती की गई थी। बूढ़ापहाड़ से सटे हुए इलाके में हेलीकॉप्टर से मतदान कर्मियों को भेजा गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी तैयारी शुरू हो गई है। पलामू लोकसभा क्षेत्र के लिए भी केंद्रीय बलों की मांग की गई है।

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