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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:38 · नई दिल्ली संस्करण

लोकसभा चुनाव : दुमका संसदीय सीट पर झामुमो का रहा दबदबा

राष्ट्रीय सागर डेस्क6 मिनट का पठन
लोकसभा चुनाव : दुमका संसदीय सीट पर झामुमो का रहा दबदबा

रांची। संथाल परगना का केंद्र और झारखंड की उप राजधानी दुमका झामुमो का पारंपरिक संसदीय सीट मानी जाती है। यहां से शिबू सोरेन ने आठ बार जीत हासिल की है। हालांकि, 2019 के चुनाव में यहां से शिबू सोरेन को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार सुनील सोरेन ने कड़े मुकाबले में पराजित किया था।आदिवासी बाहुल्य वाले इस इलाके में करीब 93 फीसदी लोग गांवों में रहते हैं। यहां की करीब 40 फीसदी आबादी आदिवासी है। इसके अलावा 12 प्रतिशत मुस्लिम आबादी भी इस इलाके में है। इसमें शिकारीपाड़ा, जामा, नाला और सारठ विधानसभा क्षेत्र हैं। वर्ष 1957 से 2019 तक यहां 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं।शिबू सोरेन 11 बार यहां से लड़ चुके हैं चुनावशिबू सोरेन 11 बार यहां से लड़ चुके हैं, जिसमें इन्हें तीन सिर्फ बार हार का सामना करना पड़ा जबकि आठ बार इन्होंने यहां से जीत हासिल की है। शिबू सोरेन यहां से 1984 में उस वक्त हारे थे जब पूरे इंदिरा गांधी की मौत के बाद पूरे देश में कांग्रेस के लिए सहानुभूति की लहर थी। दूसरी बार 1998 में शिबू सोरेन को यहां हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में मोदी लहर के कारण तीसरी बार यहां शिबू सोरेन को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा 2024 में क्या एक बार फिर से शिबू सोरेन यहां से चुनाव लड़ेंगे और क्या उन्हें यहां जीत हासिल होगी।1957 में दुमका लोकसभा सीट पर पहला चुनाव1957 में हुए लोकसभा चुनाव में दुमका से जनता पार्टी के सुरेश चंद्र चौधरी ने जीत दर्ज की थी। इन्हें 25.6 फीसदी वोट मिले थे।जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 16.6 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे। 1962 के लोकसभा चुनाव में भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली थी और सत्य चंद्र बेसरा यहां से चुनाव जीते। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 35.8 फीसदी जबकि झारखंड पार्टी को 35 फीसदी वोट मिले थे।1967 के लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने फिर से यहां चुनाव जीती और सत्य चंद्र बेसरा को 37 फीसदी वोट मिले जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 29.6 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे। 1971 के चुनाव में भी यहां से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्य चरण बेसरा ने जीत दर्ज की। इस बार कांग्रेस पार्टी को 34.2 फ़ीसदी वोट मिले जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 28 फीसदी और भारतीय जनसंघ को 15.9 फीसदी वोट मिले थे।1977 के लोकसभा चुनाव में दुमका से भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी। बटेश्वर हेम्ब्रम ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इन्हें कुल 48.8 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे। हालांकि, इस बार कांग्रेस पार्टी ने पृथ्वी चंद्र किसकू को चुनावी मैदान में उतारा था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 25.2 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 16.5 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे।1980 में शिबू सोरेन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीते1980 के लोकसभा चुनाव में यहां से आधुनिक झारखंड के निर्माता शिबू सोरेन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। यहां इन्हें कुल 36.8 फीसदी वोट मिले थे जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 35 फीसदी वोट मिले। 1984 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सीट पर कब्जा किया। उनके उम्मीदवार पृथ्वी चंद्र कुश को 52.4 फीसदी वोट मिले जबकि झामुमो से चुनाव लड़े शिबू सोरेन को 26.9 फीसदी वोट मिले।1989 में दूसरी बार शिबू सोरेन को मिली जीत1989 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर झामुमो ने कब्जा किया और शिबू सोरेन यहां से विजयी हुए। इस बार झामुमो को 59.4 फीसदी वोट मिले जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 33.5 फीसदी वोट प्राप्त हुए। 1991 के चुनाव में झामुमो के शिबू सोरेन फिर से इस सीट से विजयी हुए। उन्हें 57.5 प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ। जबकि भाजपा के बाबूलाल मरांडी को 27.8 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे।1996 के चुनाव में भी झामुमो में इस सीट पर कब्जा जमाया। इस सीट पर शिबू सोरेन तीसरी बार विजयी हुए। इन्हें 31.3 फीसदी वोट मिले जबकि भाजपा के बाबूलाल मरांडी को 30.3 फीसदी वोट मिले। 1998 में इस सीट पर परिवर्तन हुआ और भाजपा के बाबूलाल मरांडी इस सीट से विजयी हुए। भाजपा को 46.5 फीसदी वोट मिले थे जबकि झामुमो को 44 फीसदी वोट मिले थे। लगातार तीन बार सीट से विजयी रहे शिबू सोरेन को 1998 में बाबूलाल मरांडी से हार का सामना करना पड़ा था।बाबूलाल मरांडी 1999 में फिर जीते1999 में हुए लोकसभा चुनाव में फिर से इस सीट से भाजपा के बाबूलाल मरांडी जीते। इन्हें 36.3 फीसदी वोट मिले। जबकि इस बार झामुमो की रूपी सोरेन किसकू चुनाव लड़ी थीं। उन्हें 35.5 फ़ीसदी वोट मिले थे जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 34.3 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे।झारखंड बनने के बाद पहले चुनाव में शिबू सोरेन ने जीती सीटझारखंड बंटवारे के बाद 2004 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में एक बार फिर झामुमो से शिबू सोरेन यहां से विजयी हुए। 2004 में झामुमो को दुमका सीट पर 54.3 फीसदी वोट मिले जबकि भाजपा के उम्मीदवार सोनेलाल हेंब्रम को 35.5 फीसदी वोट प्राप्त हुए। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी झामुमो के शिबू सोरेन 35.5 फीसदी मत के साथ विजयी रहे जबकि भाजपा के सुनील सोरेन को 30.5 फ़ीसदी वोट मिले थे। झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक को 10.4 फ़ीसदी वोट प्राप्त हुए।शिबू सोरेन ने मोदी लहर के बाद भी बचाई सीट2014 का चुनाव दुमका के लिए काफी अहम था। पूरे देश में नरेन्द्र मोदी की लहर थी लेकिन उसके बाद भी 2014 में दुमका लोकसभा सीट से झामुमो के शिबू सोरेन ही विजयी हुए। शिबू सोरेन ने कुल 37.02 फीसदी मत प्राप्त किए जबकि भाजपा के सुनील सोरेन को 32.9 फीसदी वोट प्राप्त हुए। बाबूलाल मरांडी जो भाजपा के उम्मीदवार हुआ करते थे उन्होंने भाजपा से अलग होकर के झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया और पहली बार झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के बैनर तले दुमका से चुनाव लड़े और उन्हें कुल 17.5 फीसदी पोर्ट प्राप्त हुए।भाजपा ने 2019 में जीत दर्ज की2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का असर दुमका की सीट पर भी दिखा और इस बार भाजपा ने कुल 47.3 फीसदी वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। भाजपा के सुनील सोरेन इस सीट से विजयी हुए जबकि झामुमो के शिबू सोरेन को 42.6 फ़ीसदी वोट मिले। दुमका सीट सोरेन परिवार के लिए काफी महत्वपूर्ण और आसान सीट भी मानी जाती है। हालांकि, दुमका से कई बार झामुमो को झटका भी लगा है। अब 2024 के महासंग्राम में भाजपा ने एक बार फिर सुनील सोरेन को टिकट देकर मैदान में उतारा है। देखना होगा कि यह सीट भाजपा या झामुमो किसके खाते में जाती है।

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