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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

लाहौर बिल्डिंग हादसा: 11 लोगों की मौत, मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश जारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
लाहौर बिल्डिंग हादसा: 11 लोगों की मौत, मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश जारी

नई द‍िल्‍ली। लाहौर में बुधवार रात दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर के हरबंसपुरा इलाके में बीती रात एक तीन मंजिला इमारत ग‍िर गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य लोग घायल हो गए।

पाकिस्तान के अखबार डॉन की र‍िपोर्ट के अनुसार, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के प्रवक्ता हैरिस अली ने बताया कि मलबे से लोगों के शव न‍िकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचावकर्मी अभी भी मौके पर डटे हुए हैं। लोगों का कहना है क‍ि एक छोटी बच्ची अभी भी मलबे के फंसी हुई है।

प्रवक्ता के अनुसार, इस इमारत में तीन भाई अपने परिवारों के साथ रहते थे। उनकी बहन और उसके बच्चे भी बुधवार रात जन्मदिन मनाने के लिए वहां आए हुए थे।

इसी दौरान इमारत अचानक ढह गई।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इमारत गिरने के पीछे क्‍या वजह रही इसका पता नहीं चल पाया है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर, रिटायर्ड कैप्टन मुहम्मद अली एजाज ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं ताकि हादसे के असली कारण का पता लगाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।

इससे पहले, एक जुलाई को पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने लाहौर के काहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने की घटना पर गहरी चिंता जताई थी। इस हादसे में 14 बच्चों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

यह घटना 30 जून को हुई थी, जब एक निजी ट्यूशन अकादमी की छत अचानक गिर गई।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे में कम से कम 14 बच्चों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।

पंजाब प्रांत के स्वास्थ्य मंत्री ख्वाजा इमरान नजीर ने मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए बताया था कि मलबे के नीचे करीब 20 लोग फंसे हुए थे। इनमें वे 14 बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें काहना तहसील मुख्यालय (टीएचक्यू) अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था।

खोज और बचाव अभियान पूरा होने के बाद, रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता फारूक अहमद ने बताया कि एक महिला शिक्षिका और आठ बच्चों को कई चोटों के साथ लाहौर जनरल अस्पताल (एलजीएच) भेजा गया था।

एचआरसी का कहना है कि ऐसे ट्यूशन सेंटरों और रिहायशी इलाकों में बनी इमारतों की निर्माण गुणवत्ता की ठीक से जांच न होना गंभीर लापरवाही है।

इसी लापरवाही की वजह से मासूम लोगों की जान गई है।

मानवाधिकार परिषद ने पाकिस्तान सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मामले की तुरंत और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके। साथ ही, परिषद ने प्रशासन से घायल बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को हर संभव आर्थिक तथा मानसिक सहायता देने की अपील की है।

एचआरसी ने कहा, “मासूम बच्चों की सुरक्षा और उनके लिए सुरक्षित शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराना राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए तुरंत सख्त और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।”

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