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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

मध्य प्रदेश में संसदीय परंपराओं को समृद्ध बनाने में कुंजीलाल का रहा योगदान: सीएम मोहन यादव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मध्य प्रदेश में संसदीय परंपराओं को समृद्ध बनाने में कुंजीलाल का रहा योगदान: सीएम मोहन यादव

भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के तीन बार अध्यक्ष रहे पंडित कुंजीलाल दुबे की 130वीं जयंती के मौके पर विधानसभा में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुबे के योगदान को याद करते हुए कहा कि संसदीय परंपरा को समृद्ध बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

सीएम मोहन यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पं. दुबे तीन बार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया।

पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सुदीर्घ सेवाओं और संसदीय परंपराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पं. दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया।

विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, वहीं 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष पं. दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था।

वकालत के पेशे से राजनीतिज्ञ के रूप में स्थापित होकर पं. दुबे प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविंद शर्मा, तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।

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