बीजेपी में गीता कोड़ा के आने से बदली कोल्हान की राजनीतिक फिजा

रांची: लोकसभा चुनाव 2024 में झारखंड की राजनीति इस करवट ले रही है कि राजनीतिक पार्टियों को जमींनी हकिकत तलाशने की जरुरत पड़ने लगी है। इस बार परिस्थिति बदली हुई दिख रही है। बावजूद 2019 के चुनाव में सिंहभूम सीट से कांग्रेस की इकलौती सासंद रहीं गीता कोड़ा ने भाजपा का दामन थामकर कोल्हान की राजनीतिक फिजा में सस्पेंस डाल दिया है। भाजपा ने गीता कोड़ा को प्रत्याशी के रुप यहा से मैदान में खड़ा किया हैं। लिहाजा, कोल्हान में मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी झामुमो ने चाईबासा से इसबार अपना प्रत्याशी देने का फैसला लिया है। संभव है कि कही कांग्रेस कांप्रोमाइज भी कर ले। गीता कोड़ा से दो-दो हाथ करने के लिए जोबा मांझी, दशरथ गगराई या सुखराम उरांव को पार्टी प्रत्याशी बनाया जा सकता है। झारखंड में संथाल और कोल्हान की सीटें भाजपा और झामुमो की ताकत साबित करने में अहम भूमिका निभाएंगी। इधर कोल्हान के चाईबासा लोकसभा सीट पर नजर डाले तो कोल्हान में विधानसभा की कुल 14 सीटें हैं। 2009 में भाजपा 6 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। तब झामुमो के खाते में 04 सीटें गई थी। शेष चार सीटों में आजसू, कांग्रेस, जेवीएम और अन्य को 1-1 सीट मिला था। लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव में कोल्हान की 14 सीटों में से 07 सीटों पर झामुमो ने जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी का तमगा ले लिया था। उस वक्त भाजपा को 05 सीट, आजसू को 01 और अन्य को 01 सीट मिला था। लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का कोल्हान में खाता तक नहीं खुला।





