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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:29 · नई दिल्ली संस्करण

केरल चुनाव : एलडीएफ को तीसरी बार सत्ता की उम्मीद, यूडीएफ बोला-इस बार बदलाव तय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
केरल चुनाव : एलडीएफ को तीसरी बार सत्ता की उम्मीद, यूडीएफ बोला-इस बार बदलाव तय

तिरुवनंतपुरम। केरल में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब सियासी जंग का मैदान बदल गया है। चुनावी शोर थम चुका है लेकिन अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब जनता का फैसला सामने आएगा। वोटिंग खत्म होने के बाद राजनीतिक दलों के खेमों में सन्नाटा जरूर है लेकिन अंदरखाने की रणनीतियों का दौर तेज हो गया है।

सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कर रहे हैं, पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा नजर आ रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि अपने कामकाज और स्थिर शासन के दम पर वह लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटकर इतिहास रचेगी।

वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) भी पीछे नहीं है। विपक्ष का दावा है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है और यह चुनाव सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह साबित होगा।

इस पूरे मुकाबले में एक नया दिलचस्प मोड़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के बयान से आया है।

उन्होंने अनुमान जताया है कि इस बार केरल में त्रिशंकु विधानसभा बन सकती है, जिसमें उनकी पार्टी 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकती है। खासकर नेमोम सीट पर उनकी हाई-प्रोफाइल लड़ाई पर सबकी नजर है, जिसे इस चुनाव का प्रतीकात्मक मुकाबला माना जा रहा है।

गुरुवार देर रात तक राज्य में मतदान प्रतिशत 78.02 प्रतिशत दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़े आने बाकी हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि यह आंकड़ा 80 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है। गौरतलब है कि पिछली बार 1980 में ही मतदान 80 प्रतिशत के पार गया था।

राजनीतिक दल पुराने चुनावी रुझानों का भी सहारा ले रहे हैं।

वामपंथी खेमे का मानना है कि ज्यादा मतदान उनके पक्ष में जाता है, जबकि यूडीएफ महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी से उत्साहित है। इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत करीब 80 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी कम हो गई है और रणनीतिकार अब बूथ स्तर के आंकड़ों में जुट गए हैं। हर सीट पर समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। अब मंच भले शांत दिख रहा हो लेकिन अंदर ही अंदर हलचल जारी है। सभी दलों की नजरें 4 मई पर टिकी हैं।

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