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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

इथेनॉल फैसले पर केजरीवाल का दावा- 17 दिनों में 20 रुपये किलो बढ़े चीनी के दाम

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
इथेनॉल फैसले पर केजरीवाल का दावा- 17 दिनों में 20 रुपये किलो बढ़े चीनी के दाम

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में बढ़ती चीनी की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने के फैसले का असर अब चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 17 दिनों में चीनी की कीमत करीब 20 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए बढ़ाया और इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने की नीति अपनाई। उस समय सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया था कि इससे पेट्रोलियम आयात पर होने वाला खर्च कम होगा और देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

केजरीवाल का कहना है कि अब स्थिति ऐसी बन गई है कि चीनी की कमी को पूरा करने के लिए विदेशों से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने कहा कि करीब 17 दिन पहले जिस चीनी की कीमत 46 रुपए प्रति किलो बताई जा रही थी, वह अब बढ़कर लगभग 65 रुपए प्रति किलो हो गई है।

उन्होंने कहा कि भारत पहले चीनी का निर्यात करने वाले देशों में शामिल रहा है, लेकिन अब आयात की योजना बनाने की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों की विफलता बताते हुए सवाल उठाया कि जब गन्ने का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा तो चीनी के लिए पर्याप्त गन्ना कैसे उपलब्ध होगा।

केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने इथेनॉल के जरिए पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा बचाने की बात कही थी, लेकिन यदि चीनी का आयात करना पड़ा तो उसी विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल चीनी खरीदने में करना पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक नीति के दूसरे क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का सरकार ने सही आकलन नहीं किया।

आप संयोजक ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण लोगों की गाड़ियों में दिक्कतें आ रही हैं और माइलेज पर भी असर पड़ रहा है। उनका कहना था कि एक तरफ वाहन मालिकों को कथित तौर पर ईंधन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ आम लोगों को रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी महंगी कीमत पर खरीदनी पड़ रही है।

केजरीवाल ने केंद्र सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी बड़े फैसले से पहले उसके संभावित परिणामों का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गन्ने को इथेनॉल के लिए मोड़ने से पहले यह सोचना जरूरी था कि इससे चीनी के उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा और भविष्य में घरेलू मांग को कैसे पूरा किया जाएगा।

उन्होंने अपने बयान में नोटबंदी और कोरोना महामारी के दौरान सरकार के फैसलों का भी जिक्र किया।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के दौरान लोगों को परेशानी हुई और कोरोना संकट के समय भी सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठे। उन्होंने केंद्र सरकार पर निर्णय लेने में दूरदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के फैसलों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

केजरीवाल ने कहा कि महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है। चीनी जैसी रोजमर्रा की वस्तु की कीमत में अचानक बढ़ोतरी से चाय, मिठाई, खाद्य पदार्थ और छोटे कारोबारों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करने और अपनी इथेनॉल नीति के प्रभावों की समीक्षा करने की मांग की।

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