पूर्व केंद्रीय मंत्री ने 1992 में अयोध्या में अपने द्वारा की गयी कारसेवक की तस्वीर जारी की
नई दिल्ली।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व अब गांधी स्मृति के उपाध्यक्ष विजय गोयल की यह 30 साल पहले की दुर्लभ फोटो हैं जब वे कार सेवा के लिए 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढांचे पर अपने जत्थे के साथ पहुचें थे। गोयल ने 6 दिसंबर 1992 के दिन को याद करते हुए कहा कि वे 3 दिसंबर को ट्रैन से अयोध्या के लिए निकल गए थे। वहां अयोध्या पहुंच उन्होंने अपने कपड़ो पर पुलिस जैसी वर्दी चढ़ा ली थी ताकि गुम्बद के पास पहुंच सके।लाखों की भीड़ में वहां वह सीता रसोई तक पहुंच गए, जहाँ लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, प्रमोद महाजन और साध्वी ऋतम्भरा मंच पर मौजूद थी लाखों की भीड़ में उन्माद छाया हुआ था मंच से श्रीराम के जयकार के नारे लग रहे थे। तभी गुम्बद पर कमंद फेंकी गयी देखते ही देखते रस्सी से कार सेवक गुम्बद पर चढ़ गए। कब कहां से फावड़े-कस्सी आ गए व गुम्बद टूटने लगा पता ही नहीं चला। तब आडवाणी ने मुझे व प्रमोद महाजन को कहा कि आप गुंबद जाकर कार सेवकों को नीचे उतारिये कोई दुर्घटना न हो जाए।
गोयल ने बताया कि गुंबद के गिरने पर लाल कृष्ण आडवाणी के तो चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, जबकि कार सेवक ख़ुशी से चिल्ला रहे थे। वैसे, जब तक गुंबद गिरा नहीं था, तब तक पुलिस का कोई भय नहीं था, लेकिन बाद में लगा कि अब सेना आ जाएगी। इसके बाद सभी वो होगा, जो कभी सोचा भी नहीं था। ऐसे में सबको कहा गया कि जितनी जल्दी हो सके सभी यहां से निकल ले। इसके बाद सभी ने अपने गले से पटके, टोपिया और कार सेवकों की सभी निशानियां को फेंक दिया या छिपा दिया। ताकि कोई उन्हें पहचान ना पाए।
फिर रातों-रात ट्रेन पकड़ कर वह अपने जत्थे के साथ निकल गए, क्योंकि वहां रुकना खतरे से खाली नहीं था विजय गोयल बताते हैं कि जिन गलियों में पहले दिन आरती की थालियां लिए अयोध्यावासी घर के बाहर खड़े थे, वहां बाबरी मस्जिद गिरने के बाद सन्नाटा पसरा पड़ा था। लोगों में इतना जोश था हमारी वहां कौन सुनने वाला था। थोड़ी देर बाद देखते देखते तीनो गुम्बद रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ की तरह ध्वस्त हो गए। चारों ओर लाखों की भीड़ उन्माद के नारे लगा रहे थे " कसम राम की खाते हैं, मंदिर यहीं बनाएंगे"





