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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:05 · नई दिल्ली संस्करण

इस तिथि को मनाई जाएगी कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
इस तिथि को मनाई जाएगी कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

नई दिल्ली। पौष माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कालाष्टमी का पूजन भी है। ऐसे में कई जातक इस दिन को लेकर असमंजस में हैं, लेकिन इसका उत्तर द्रिक पंचांग में उपलब्ध है, जिसके अनुसार कालाष्टमी 11 दिसंबर को मनाई जाएगी।

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

इस तिथि पर कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का भी योग रहा है।

पंचांगानुसार, अष्टमी तिथि 11 दिसंबर दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर 12 दिसंबर दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। कालाष्टमी की पूजा शाम में होती है, इसलिए व्रत 11 दिसंबर को रखा जाएगा।

कालाष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि के दिन भी हो सकता है। पौराणिक ग्रंथों में बताया गया है कि जिस तिथि को अष्टमी तिथि प्रबल होती है, उस दिन इसका व्रत किया जाता है।

कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित है।

इस दिन भगवान का पूजन करने मात्र से जातक के जीवन से भय, बाधा, और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। विशेषकर रात्रि में भैरव चालीसा, भैरव स्तोत्र, या ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवान काल भैरव को उड़द दाल, काले तिल, और मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही कालाष्टमी के दिन, काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता काल भैरव का वाहन है।

इसी के साथ ही इस तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान कृष्ण की पूजा करने से यश, कीर्ति, धन, ऐश्वर्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

दरअसल, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्री कृष्ण का अवतरण हुआ था। इसलिए हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है। जन्माष्टमी का पूजन ज्यादातर रात में ही होता है। इसलिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 11 दिसंबर को ही मनाया जाएगा।

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