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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:41 · नई दिल्ली संस्करण

न्याय व्यवस्था को मिलेगा बूस्ट, जजों की संख्या बढ़ाने के फैसले पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
न्याय व्यवस्था को मिलेगा बूस्ट, जजों की संख्या बढ़ाने के फैसले पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कैबिनेट निर्णय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बुधवार को पोस्ट किया, "मंत्रिमंडल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय है, जो हमारे राष्ट्र के न्यायिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और लोगों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने से जुड़ा है।"

बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक-2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि का फैसला लिया है।

मंगलवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई।

कैबिनेट ने संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

कैबिनेट बैठक के बाद आधिकारिक बयान में कहा गया कि न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा। न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा, जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून की ओर से अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 के जरिए बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था।

हालांकि, मंत्रिमंडल की ओर से भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित थी, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटा दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।

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