श्रद्धा, सेवा और एकता की यात्रा: मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी का भावपूर्ण संदेश

श्रद्धा, सेवा और एकता का संगम: प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’ में
तीर्थयात्राओं का संदेश
नई दिल्ली , 29.जून 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन
की बात’ की 123वीं
कड़ी में एक भावुक और आध्यात्मिक संदेश साझा करते हुए देशवासियों को धार्मिक
यात्रा की महत्ता का स्मरण कराया। लंबे समय के अंतराल के बाद
कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः शुभारंभ होना न केवल शिवभक्तों
के लिए बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के लिए एक दिव्य और ऐतिहासिक क्षण है। कैलाश
मानसरोवर – यह कोई सामान्य तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान शिव का धाम है, जो
सदियों से हिन्दू, बौद्ध और जैन परंपराओं में आस्था और
साधना का सर्वोच्च केंद्र रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे भारत की
आध्यात्मिक परंपरा समय के साथ और भी समृद्ध होती जा रही है। 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है और इसके साथ
ही सावन का पवित्र महीना भी समीप है – वह समय जब भक्तजन शिव की भक्ति में लीन होकर काँवड़ यात्राओं,
व्रतों और पूजाओं में रमे रहते हैं। उन्होंने हाल ही में
सम्पन्न हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा हो या गुजरात, देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु इन यात्राओं में भाग लेते
हैं।
यह तीर्थ यात्राएं सिर्फ धार्मिक रस्में
नहीं हैं, बल्कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की आत्मा को साकार करती हैं। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम – जब
पूरा भारत एक भक्ति-सूत्र में बंधता है, तो
यह केवल एक आध्यात्मिक यात्रा नहीं, बल्कि
राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का उत्सव बन जाता है।
प्रधानमंत्री ने न केवल तीर्थयात्रियों
को शुभकामनाएं दीं, बल्कि उन हजारों सेवा-समर्पित
व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त किया, जो
इन यात्राओं को सफल और सुरक्षित बनाने में दिन-रात जुटे रहते हैं – सुरक्षा बल, स्वयंसेवी संस्थाएं, डॉक्टर, सफाईकर्मी और स्थानीय प्रशासन।
यह संदेश हमें यह भी सिखाता है कि जब श्रद्धा, सेवा और अनुशासन साथ चलते हैं, तो
यात्राएं सिर्फ मंज़िल तक पहुँचने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि
वे आत्मिक शुद्धि, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकजुटता
की प्रेरणा बन जाती हैं। यही भारत की आत्मा है – विविधता
में एकता, और श्रद्धा में शक्ति।





