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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:19 · नई दिल्ली संस्करण

जीतू पटवारी का CM को पत्र, शराब टेंडरों में कथित मिलीभगत की जांच की मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
जीतू पटवारी का CM को पत्र, शराब टेंडरों में कथित मिलीभगत की जांच की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार काे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश में शराब टेंडरों में कुछ चुनिंदा कंपनियों के कथित लंबे समय से बने वर्चस्व और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक प्रदेश के 33 जिलों में हुए प्रमुख शराब टेंडरों की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ पूरी प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग की है।

जीतू पटवारी ने कहा कि उपलब्ध दावों के अनुसार शराब कारोबार में चार समूहों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत तक बताई जा रही है और कई जिलों में वर्षों से उन्हीं कंपनियों को लगातार टेंडर मिलने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि ये तथ्य सही हैं तो इसकी जांच जरूरी है, क्योंकि इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठते हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद पुराने पैटर्न पर सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि अलग-अलग वर्षों में टेंडर के परिणामों में समान पैटर्न दिखाई देता है तो सरकार को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की कार्रवाई के बाद वर्ष 2022 में कथित तौर पर बदले टेंडर पैटर्न का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इसके बाद फिर पुराने हालात दिखाई दे रहे हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाना उचित होगा।

पटवारी ने कहा कि शराब कारोबार से सरकार को हजारों करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और राज्य के राजस्व हितों की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी कारोबारी समूह को संरक्षण दिए जाने के बजाय टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

इन बिंदुओं पर जांच की मांग

पीसीसी चीफ पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्ष 2012-13 से अब तक प्रदेश में हुए प्रमुख शराब टेंडरों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। साथ ही यह जानकारी सार्वजनिक की जाए कि किन कंपनियों ने किन जिलों में कितने वर्षों तक टेंडर हासिल किए।

उन्होंने प्रत्येक टेंडर में शामिल कंपनियों, उनकी बोलियों, पात्रता और अंतिम चयन की प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की है। इसके अलावा यह जांच कराने को कहा है कि कहीं किसी कंपनी या कंपनियों के समूह ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित तो नहीं किया।

उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत, कार्टेल या अधिकारियों और कंपनियों के बीच किसी संभावित गठजोड़ की आशंका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही पिछले वर्षों में शराब टेंडरों से सरकार को मिले वास्तविक राजस्व और अधिक प्रतिस्पर्धी बोली की स्थिति में संभावित राजस्व के अंतर का आकलन कराने की मांग की है।

तथ्य सामने आने चाहिए

पटवारी ने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रही है तो सरकार को संबंधित दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक करने में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर रिपोर्ट प्रदेश की जनता के सामने रखने की मांग की है।

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