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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:25 · नई दिल्ली संस्करण

जापान, भारत में निवेश दोगुना करने की बना रहा योजना, पीएम मोदी की यात्रा पर हो सकती है घोषणा : रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। जापान सरकार अगले 10 वर्षों में निजी क्षेत्र के जरिए भारत में 10 ट्रिलियन येन (68 अरब डॉलर) का निवेश करने की योजना बना रही है। यह जानकारी टोक्यो की एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई।

जापान के 'द असाही शिंबुन' अखबार में सूत्रों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त को टोक्यो में अपनी बैठक के दौरान इस नए लक्ष्य की पुष्टि कर सकते हैं।

यह योजना जापान के वर्तमान लक्ष्य का विस्तार करेगी, जिसके तहत वह पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन येन का निवेश किया जाना है। इसकी घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने मार्च 2022 में अपनी भारत यात्रा के दौरान की थी।

प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी किए जाने वाले संयुक्त बयान में इस नए निवेश लक्ष्य को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी 29 अगस्त से जापान की तीन दिवसीय यात्रा पर होंगे, जो मई 2023 में हिरोशिमा में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद उनकी पहली यात्रा होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जापानी कारोबारियों ने तब से हर वित्तीय वर्ष में भारत में औसतन लगभग 1 ट्रिलियन येन का निवेश किया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों सरकारें एक आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू करने की भी योजना बना रही हैं, जो आर्थिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक नया द्विपक्षीय सहयोग ढांचा है, जिसमें महत्वपूर्ण सामग्रियों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना और मुख्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की गारंटी देना जैसी चीजें शामिल होंगी।

यह पहल सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और एआई जैसे वैज्ञानिक क्षेत्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी।

असाही शिंबुन की रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई तकनीक और स्टार्टअप्स में सहयोग को विशेष रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक एआई सहयोग पहल की स्थापना की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 नामक एक परियोजना विकसित की जाएगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग से परे आर्थिक सहयोग का विस्तार करके सेमीकंडक्टर, एआई और स्टार्टअप्स जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों को शामिल किया जा सके।

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