पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर वापस लेने का जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम ने लिया संकल्प
नई
दिल्ली, 22 फ़रवरी । मीरपुर बलिदान भवन समिति और जम्मू कश्मीर
पीपल्स फोरम, नई दिल्ली ने आज पीओके वापस लेने का “संकल्प दिवस” मनाया।
कांस्टीट्यूशन
क्लब में आयोजित कार्यक्रम में उच्च न्यायालय जम्मू द्वारा 1947 में
पीओजेके से विस्थापित 5300 परिवारों के पक्ष में दिए गए फैसले का स्वागत
किया गया, जो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के बाहर बसे हुए हैं और उन्हें
प्रधानमंत्री पुनर्वास विकास पैकेज, 2015 के अंतर्गत पैकेज में शामिल किया
गया है।
इस अवसर पर आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस को दिल्ली उच्च
न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल (सेवानिवृत्त) भारत गुप्ता और सेवानिवृत्त
न्यायमूर्ति विद्याभूषण ने संबोधित किया। प्रेस कांफ्रेंस में 1947 में
पीओजेके से विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने विभाजन की व्यथा व कबायलियों
द्वारा किये गए अत्याचारों के बारे में बताया।
जम्मू कश्मीर पीपल्स
फोरम द्वारा बताया गया कि 22 फरवरी, 1994 को भारतीय संसद ने सर्वसम्मति
से एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि भारत के लोगों की ओर से दृढ़ता से घोषणा की
जाती है कि जम्मू और कश्मीर राज्य भारत का एकीकृत हिस्सा रहा है और रहेगा
और अलग करने के किसी भी प्रयास का देश के बाकी हिस्सों से इसका हर तरह से
विरोध किया जाएगा। आज हम पाकिस्तान को भारत सरकार के कड़े फैसले की याद
दिलाने के लिए एकत्र हुए हैं।
मीरपुर बलिदान भवन समिति और
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम, 1947 में पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से
विस्थापित होकर वर्तमान में जम्मू और कश्मीर के बाहर रहने वाले 5300
परिवारों को प्रधानमंत्री राहत पैकेज 2015 के तहत 5.5 लाख रुपये पैकेज का
लाभ दिए जाने के महत्वपूर्ण फैसले पर जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय का
स्वागत करते हैं। उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में दर्जा और अधिकार देने का
भी निर्देश दिया, जो पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य में बसे 1947 के
पीओजेके के 26319 परिवारों को प्राप्त था और उनका पैकेज लाभ जल्द 6 महीने
के भीतर दिया जाना चाहिए।
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम
महिदर मेहता, डॉ. सुदेश रतन, मदन मोहन गुप्ता, श्याम सुन्दर गुप्ता विशेष
रूप से उपस्थति रहे। उन्होंने 1947 के पीओजेके के विस्थापित परिवारों की और
से जम्मू-कश्मीर के न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान भारत
सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार से यथाशीघ्र अपेक्षित अधिसूचना जारी करने का
भी आग्रह किया गया। विस्थापन के समय के वास्तविक पीड़ितों में अभी केवल 2 से
3 प्रतिशत व्यक्ति जीवित हैं, जिनकी आयु भी 80 वर्ष से अधिक हो गयी है,
वर्तमान सरकार इस मामले में शीघ्र कार्यवाही करे तो जीवन के अंतिम समय में
मान्यता मिलने से इन बुजुर्गों को संतोष होगा। कार्यक्रम के समापन पर पाक
अधिकृत जम्मू-कश्मीर वापस लेने का जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम तथा मीरपुर
बलिदान भवन समिति ने संकल्प लिया।





