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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:26 · नई दिल्ली संस्करण

जेम्स लेन मामला: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने मांगी माफी, बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया माफीनामा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
जेम्स लेन मामला: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने मांगी माफी, बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया माफीनामा

मुंबई। अमेरिकी लेखक जेम्स लेन मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। छत्रपति शिवाजी महाराज और राजमाता जिजाऊ की कथित मानहानि से जुड़े इस मामले में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने माफी मांग ली है। इसके साथ ही माफीनामा बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया है और 20 साल बाद सतारा लोकसभा से संसद सदस्य उदयनराज भोसले को लेटर भेजा है।

यह मामला वर्ष 2003 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया द्वारा प्रकाशित जेम्स विलियम लेन की किताब 'शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया' से जुड़ा है। आरोप है कि पुस्तक के कुछ अध्याय और अंश छत्रपति शिवाजी महाराज और राजमाता जिजाऊ की छवि को ठेस पहुंचाने वाले थे। इसके विरोध में आपराधिक मामला संख्या 3230/2004 के तहत सतारा के माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में निजी शिकायत दर्ज की गई थी।

मामले की सुनवाई के बाद 2 अप्रैल 2005 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सतारा ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।

इसके बाद बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिकाएं दाखिल की थीं।

बचाव पक्ष में सैयद मंजर खान (संपादक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया), डॉ. श्रीकांत बहुलेकर (संस्कृत प्रोफेसर, तिलक महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, पुणे), सुचेता परांजपे (प्रोफेसर, तिलक महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, पुणे) और वीएल मंजुल (लाइब्रेरियन, भंडारकर संस्थान) के नाम शामिल थे।

ये याचिकाएं 17 दिसंबर 2025 को कोल्हापुर सर्किट बेंच में न्यायमूर्ति शिवकुमार एस दिगे के समक्ष सूचीबद्ध हुईं। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने अदालत को बताया कि वे शिकायतकर्ता (श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले) से माफी मांगने को तैयार हैं और यह माफी अखबारों में प्रकाशित की जाएगी।

शिकायतकर्ता की ओर से वकील शैलेश धनंजय चव्हाण, रणजीत पाटिल, सुजीत निकम और धवलसिंह पाटिल ने पक्ष रखा। इसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को 15 दिनों के भीतर राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में माफी प्रकाशित करने का आदेश दिया।

माफी पत्र में कहा गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज करोड़ों लोगों के दिलों में सम्मान का स्थान रखते हैं और पुस्तक से यदि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए गहरा खेद है।

साथ ही उदयनराजे भोसले से बिना शर्त क्षमा मांगी गई है।

बता दें कि इस किताब को लेकर विवाद वर्ष 2004 में तब गहराया था, जब संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने पुणे स्थित भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ की थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि संस्थान ने लेखक को शोध में सहयोग दिया था और किताब में शिवाजी महाराज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।

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