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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:18 · नई दिल्ली संस्करण

पीओके हिंसा का मुद्दा यूके संसद में गूंजा, स्वतंत्र जांच की उठी मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीओके हिंसा का मुद्दा यूके संसद में गूंजा, स्वतंत्र जांच की उठी मांग

लंदन। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के तनावपूर्ण और बिगड़े हालात पर कई ब्रिटिश सांसदों ने गहरी चिंता जताई है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई में 40 से अधिक नागरिक मारे गए और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायर्न ने कहा कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर " गोली" चलाने की रिपोर्ट्स "चिंता का विषय" हैं। बायर्न ने कब्जे वाले क्षेत्र में संचार सुविधाओं पर बैन और मानवाधिकार उल्लंघनों को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया।

उन्होंने कहा, " यूके संसद के क्रॉस-पार्टी समूह 'ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर' ने दो मांगें रखी हैं।

पहली, लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन से तत्काल बातचीत की जाए और कहा जाए कि इसे रोका जाए। दूसरी, हम अपने विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से भी मिलना चाहते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने पूरी शिद्दत से अपनी बात रख रहे हैं। यहां जरूरत इस बात की है कि कई साल पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लेकर जो वादे किए गए थे उनका सम्मान किया जाए।

लेकिन फिलहाल तुरंत हिंसा रुकवानी हमारी प्राथमिकता में है।"

ब्रिटिश सांसद ने कहा, "हमें तत्काल तनाव कम करने की जरूरत है। इस समय सोच समझकर कदम उठाने की जरूरत है। और सबसे जरूरी, अब कश्मीरियों के मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए। "

एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने पीओके में नागरिकों की हत्या को "त्रासदी" करार दिया और कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह के अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग की "पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी" जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "मैं सभी पक्षों से संयम बरतने, नागरिक जीवन की रक्षा करने और शांतिपूर्ण संवाद में शामिल होने का आग्रह करता हूं।

स्थायी समाधान केवल शांत, रचनात्मक बातचीत से ही संभव है, न कि हिंसा या तनाव बढ़ाने से। मेरी संवेदनाएं सभी पीड़ितों के साथ है, विशेषकर उन मतदाताओं के साथ जिनके परिवार और प्रियजन इस क्षेत्र में हैं।"

इस बीच, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि पीओके के रावलाकोट से आ रही परेशान करने वाली रिपोर्ट्स प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान के पुराने "गैरकानूनी" पैटर्न को ही दर्शाती हैं।

उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनावों के बीच प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग की रिपोर्ट्स के बाद संचार माध्यमों पर पाबंदियों को हटाने की मांग की। अधिकारियों से क्षेत्र में मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को अनुमति देने का भी आग्रह किया।

कैलामार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के आदेश दिए जाने चाहिए। जब तक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदियां रहेंगी तब तक जमीन पर स्थिति का सही आकलन नहीं किया जा सकेगा।"

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