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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:57 · नई दिल्ली संस्करण

US-China Tariff War खत्म? ट्रंप-जिनपिंग की डील से भारत को क्यों है खतरा?

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
US-China Tariff War खत्म? ट्रंप-जिनपिंग की डील से भारत को क्यों है खतरा?

वॉशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ने पूरी दुनिया की ट्रेड पॉलिटिक्स बदल दी है। दोनों नेताओं ने 24-25 सितंबर को हुई स्टेट विजिट के बाद $30 बिलियन के सामानों पर टैरिफ कम करने का ऐलान किया है। इसे "30-फॉर-30" फ्रेमवर्क नाम दिया गया है। अमेरिका चीन से आने वाले 77 कैटेगरी के सामानों जैसे खिलौने, आतिशबाजी, बर्तन, क्रिसमस डेकोरेशन पर टैरिफ घटाएगा। वहीं चीन अमेरिका से आने वाले 1,619 प्रोडक्ट्स जैसे अनाज, मक्का, लकड़ी, मेडिकल उपकरण, कॉस्मेटिक्स पर रियायत देगा। 90% से ज्यादा प्रोडक्ट्स को मोस्ट-फेवर्ड-नेशन ट्रीटमेंट मिलेगा।

इसके साथ ही दोनों देशों ने अपना ट्रेड ट्रूस 10 नवंबर 2025 से बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक कर दिया है और एक नया AI डायलॉग ग्रुप और ट्रेड काउंसिल बनाने पर सहमति जताई है। चीन ने 2027 और 2028 में हर साल कम से कम 10 मिलियन टन अमेरिकी कोयला खरीदने का वादा भी किया है। लेकिन सबसे अहम बात - सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को इस डील से बाहर रखा गया है। पिछले 2 साल में जब अमेरिका ने चीन पर 145% तक टैरिफ लगाया था, तो कई अमेरिकी कंपनियां भारत, वियतनाम और मेक्सिको की तरफ गईं। Apple, खिलौना और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भारत को ऑर्डर मिले। अब अगर अमेरिका-चीन के बीच सस्ता ट्रेड फिर शुरू हो गया तो वो कंपनियां वापस चीन जा सकती हैं। भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पर सीधा असर पड़ेगा।

चीन अमेरिका को कम टैरिफ पर माल बेचेगा, लेकिन चीन का ओवरप्रोडक्शन अभी भी जारी है। अगर अमेरिकी बाजार में चीन का माल पूरा नहीं बिका, तो वही सस्ता माल भारत और दक्षिण एशिया में डंप किया जाएगा। स्टील, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स में भारतीय MSMEs पर दबाव बढ़ेगा। अमेरिका अब चीन को सोयाबीन की जगह मक्का, गेहूं, मीट और कोयला बेचने पर फोकस कर रहा है। भारत भी अमेरिका से ट्रेड डील चाहता है, खासकर एग्री प्रोडक्ट्स पर। अगर चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए दरवाजे खोल दिए, तो भारत के लिए बेहतर डील लेना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रूस सिर्फ अस्थायी स्थिरता है, कोई स्थायी समाधान नहीं है। भारत को इस समय को मौका समझना चाहिए।

पहला, PLI स्कीम और सेमीकंडक्टर जैसे संवेदनशील सेक्टर्स में तेजी लानी होगी, क्योंकि अमेरिका-चीन डील में इन्हें बाहर रखा गया है - यहीं भारत के लिए जगह है। दूसरा, अमेरिका के साथ अपनी मिनी ट्रेड डील को जल्दी फाइनल करना होगा, ताकि टैरिफ एडवांटेज बना रहे। तीसरा, चीन से आने वाले सस्ते माल पर एंटी-डंपिंग निगरानी बढ़ानी होगी। ट्रंप और जिनपिंग की दोस्ती कभी भी पलट सकती है, लेकिन भारत को अपनी तैयारी पक्की रखनी होगी।

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