रामनाथ ठाकुर उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे? जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज

रामनाथ ठाकुर उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे? जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है और देश की राजनीति एक बार फिर नए समीकरणों की ओर बढ़ चली है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता तथा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार को लेकर अटकलें तेज़ हैं और अब रामनाथ ठाकुर का नाम सबसे प्रबल दावेदारों में गिना जाने लगा है।
रामनाथ ठाकुर का राजनीतिक सफर बिहार की सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़ा रहा है। वे न केवल पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं, बल्कि स्वयं भी सामाजिक संतुलन और जनकल्याण की राजनीति के परिचित चेहरा बन चुके हैं। वर्तमान में वे जेडीयू कोटे से राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता कर्पूरी ठाकुर को हाल ही में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जिससे ठाकुर परिवार का सामाजिक और राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
रामनाथ ठाकुर की छवि एक साफ-सुथरे और संघर्षशील जननेता की रही है। वे अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से आते हैं, जिसकी बिहार में अच्छी खासी संख्या है। इस वर्ग की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भाजपा-जेडीयू गठबंधन हमेशा सजग रहा है। उपराष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल बिहार की राजनीति को संतुलित किया जा सकता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सामाजिक न्याय का संदेश दिया जा सकता है।
जेपी नड्डा और रामनाथ ठाकुर की मुलाकात को लेकर भाजपा के सूत्र भले ही इसे महज ‘वोटर लिस्ट रिविजन’ से जोड़कर देख रहे हों, लेकिन सियासी गलियारों में यह मुलाकात संभावित उपराष्ट्रपति पद की तैयारी के तौर पर देखी जा रही है। ऐसे समय में जब एनडीए को जेडीयू जैसे पुराने सहयोगी दल को साधे रखना है और बिहार विधानसभा चुनाव भी नज़दीक हैं, तो रामनाथ ठाकुर जैसे संतुलित और सर्वमान्य चेहरे को आगे लाना गठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, एनडीए की ओर से अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से रामनाथ ठाकुर का नाम लगातार चर्चा में है और उन्हें लेकर सहमति बनती दिख रही है, वह इस ओर इशारा करती है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए एक बार फिर सामाजिक संतुलन और राजनीतिक सूझबूझ को प्राथमिकता देने जा रहा है।





