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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:00 · नई दिल्ली संस्करण

ईरान का दावा: फार्स में मिला 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस भंडार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ईरान का दावा: फार्स में मिला 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस भंडार

तेहरान। ईरान ने घोषणा की है कि उसके दक्षिणी फार्स प्रांत में 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्‍यादा प्राकृतिक गैस का भंडार मिला है।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने रविवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि इस भंडार से 160 अरब क्यूबिक मीटर से अधिक गैस निकाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस गैस क्षेत्र का विकास जल्द से जल्द शुरू करने के लिए अधिकारी तेजी से जरूरी कदम उठा रहे हैं।

उन्होंने इस गैस को 'स्वीट' प्राकृतिक गैस बताया। इसका मतलब है कि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बहुत कम है, जिससे गैस के उत्पादन और विकास की लागत कम हो सकती है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान का ऊर्जा क्षेत्र कई महीनों से उसके बुनियादी ढांचे पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के असर का सामना कर रहा है।

पाकनेजाद ने कहा कि यह खोज 'देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत आधार साबित होगी।'

इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा, न होर्मुज स्‍ट्रेट के जरिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से।

ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।"

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आई।

ट्रंप ने बुधवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई' की जाएगी।

उन्होंने कहा, "यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।" ट्रंप ने इस कदम को 'आर्थिक डी-डे" बताया।

18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तनाव खत्म करने की बात शामिल थी।

इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके एक अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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