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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

सुपौल में एसएसबी की सतर्कता से मानव तस्करी की आशंका नाकाम, सात नेपाली नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बचाया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सुपौल में एसएसबी की सतर्कता से मानव तस्करी की आशंका नाकाम, सात नेपाली नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बचाया

सुपौल। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की सतर्कता से सात नेपाली नाबालिग बच्चों को संभावित मानव तस्करी और बाल श्रम के लिए ले जाए जाने से बचा लिया गया। यह कार्रवाई वीरपुर स्थित 45वीं वाहिनी एसएसबी के जवानों ने नियमित जांच अभियान के दौरान की।भीमनगर चेक पोस्ट पर ड्यूटी के दौरान जवानों की नजर सात नाबालिग बच्चों पर पड़ी, जो सीमा चौकी की ओर आ रहे थे।पूछताछ के दौरान बच्चे अपनी नागरिकता से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और उनके साथ कोई अभिभावक भी मौजूद नहीं था। बातचीत में बच्चों के बयानों में बार-बार विरोधाभास मिलने पर जवानों का संदेह गहरा गया।मामले की सूचना मिलने पर मानव तस्करी विरोधी इकाई (एएचटीयू) ने बच्चों से विस्तृत पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि उन्हें बाल श्रम कराने के उद्देश्य से भारत लाया जा रहा था। इसके बाद एसएसबी और एएचटीयू ने संयुक्त रूप से आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।बचाए गए बच्चों की पहचान नेपाल के सप्तरी जिले के रहने वाले सूरज कुमार सदा (16), राहुल कुमार सदा (15), भोगिंदर सदा (14), रोशन कुमार (13), किशन कुमार सदा (10), प्रवीण सदा (10) और अरविंद सदा (8) के रूप में हुई है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सातों बच्चों को सुरक्षित रूप से नेपाल प्रहरी, भांटाबारी के हवाले कर दिया गया।इस अभियान में एसएसबी के सहायक उपनिरीक्षक चंदन सिंह, मानव तस्करी विरोधी इकाई के सहायक उपनिरीक्षक भारत भूषण सहित अन्य जवानों की सक्रिय भूमिका रही।45वीं वाहिनी एसएसबी, वीरपुर के द्वितीय कमान अधिकारी एवं कार्यवाहक कमांडेंट जगदीश कुमार शर्मा ने कहा कि एसएसबी मानव तस्करी, बाल शोषण और सीमा पार होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में नियमित निगरानी, सघन जांच और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से ऐसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।

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