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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:22 · नई दिल्ली संस्करण

भारत का सर्विसेज ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 26 में 205-207 अरब डॉलर रहने का अनुमान : रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। भारत के व्यापारिक निर्यात पर अमेरिकी की ओर से टैरिफ लगाने के बावजूद देश का सर्विसेज ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 26 में 205-207 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।

देश का चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में तेजी से घटकर 2.4 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.2 प्रतिशत) रह गया, जो वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में दर्ज 8.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.9 प्रतिशत) के घाटे से काफी कम है।

आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया कि यह उसके जीडीपी के 0.7 प्रतिशत के पूर्व अनुमान से भी काफी कम रहा, जिसे मुख्य रूप से अपेक्षा से ज्यादा बेहतर रेमिटेंस और हाई सर्विसेज ट्रेड सरप्लस से मदद मिली।

वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सर्विसेज से आय सालाना आधार पर 19.9 प्रतिशत बढ़कर 66.1 अरब डॉलर हो गई, जिसने 68.5 अरब डॉलर के व्यापारिक व्यापार घाटे की भरपाई कर दी है।

आईसीआरए ने चेतावनी दी है कि व्यापारिक व्यापार घाटे में तेज वृद्धि के कारण, चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 13-15 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.5 प्रतिशत) हो जाएगा।

आईसीआरए के मुताबिक, भारतीय वस्तुओं पर हाल ही में लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात, विशेष रूप से कपड़ा, हीरे, सी-फूड और चमड़े पर दबाव पड़ने की उम्मीद है।

अगर ये टैरिफ पूरे वित्तीय वर्ष में जारी रहते हैं, तो वित्त वर्ष 26 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 0.6 प्रतिशत था।

आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में निकासी के बाद, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में भारत में 8.1 अरब डॉलर का शुद्ध वित्तीय प्रवाह देखा गया। हालांकि, आरक्षित परिसंपत्ति अभिवृद्धि वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही के 8.8 अरब डॉलर से घटकर 4.5 अरब डॉलर रह गई।

22 अगस्त तक विदेशी मुद्रा भंडार 691 अरब डॉलर था। 2025 में (1 सितंबर तक) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

आईसीआरए को उम्मीद है कि निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 87.0-89.0 के दायरे में रहेगा।

आउटलुक पर रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू खाते के घाटे की दिशा अमेरिका के साथ टैरिफ-संबंधी घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।

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