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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:49 · नई दिल्ली संस्करण

वित्त वर्ष 2021-25 के भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा : रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021 और 2025 के बीच भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा, जो इसी अवधि में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 5.4 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है।

क्रिसिल की 'द रोड अहेड फॉर इंवेस्टमेंट' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में भारत की निवेश दर दशकीय औसत से अधिक रही, जिसे मुख्य रूप से सरकारी और घरेलू खर्च का समर्थन प्राप्त था।

रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत का वास्तविक निवेश 6.9 प्रतिशत प्रति वर्ष (औसत वास्तविक वृद्धि) बढ़ा, जो 5.4 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर से अधिक है।"

सकल स्थिर पूंजी निर्माण के रूप में मापा गया निवेश, वित्त वर्ष 2016 और 2025 के बीच औसत की तुलना में नॉमिनल और रियल दोनों ही रूपों में मजबूत रहा।

सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) ने इस गति को काफी हद तक आगे बढ़ाया, जिनकी संयुक्त वास्तविक निवेश वृद्धि वित्त वर्ष 2022-24 में औसतन 13.9 प्रतिशत रही।

सबसे बड़े योगदानकर्ता, परिवारों ने भी मजबूत निवेश गतिविधि देखी, मुख्यतः रियल एस्टेट में, जिसकी वृद्धि दर इसी अवधि में 13.4 प्रतिशत रही।

हालांकि, निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय कमजोर कड़ी बना रहा, जिसने वित्त वर्ष 2022-24 में वास्तविक रूप से केवल 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई।

क्रिसिल ने कहा कि जहां कॉर्पोरेट बैलेंस शीट मज़बूत हैं और बैंक ऋण देने की बेहतर स्थिति में हैं, वहीं अमेरिकी टैरिफ और ग्लोबल ट्रेड फ्रिक्शन जैसी बाहरी चुनौतियों ने बिजनेस सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है।

भविष्य को देखते हुए, क्रिसिल ने आगाह किया कि राजकोषीय समेकन के कारण मध्यम अवधि में सरकार के नेतृत्व वाले निवेश में कमी आ सकती है।

गति बनाए रखने के लिए, रिपोर्ट में नियामक बाधाओं को कम करने, भूमि और बिजली को अधिक किफायती बनाने, अनुबंध प्रवर्तन को मजबूत करने और टैरिफ बाधाओं को कम करने तथा निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करने हेतु मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को तेज करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की घरेलू परिस्थितियां जैसे - स्वस्थ बैंक बैलेंस शीट, मजबूत उपभोग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोत्साहनदीर्घकालिक निवेश वृद्धि के लिए सहायक बनी हुई हैं।

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