मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:35 · नई दिल्ली संस्करण

उत्पन्ना एकादशी: पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग, जानें श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए क्या करें क्या न करें

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उत्पन्ना एकादशी: पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग, जानें श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए क्या करें  क्या न करें

नई दिल्ली। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी तिथि शनिवार को है। इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे। द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 9 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

पद्म, स्कंद और भविष्योत्तर पुराण में उत्पन्ना एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि इस एकादशी पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जातक के जीवन से पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस एकादशी पर धन की देवी मां लक्ष्मी और श्री हरि की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दान करने से व्यक्ति को कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। साथ ही यह दिन भक्तों के लिए अत्यधिक पुण्य प्राप्त करने का अवसर होता है।

धार्मिक ग्रंथों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ उपायों के बारे में बताया गया है। इस तिथि पर व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए।

विधि-विधान से व्रत करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें। विष्णु भगवान की प्रतिमा स्थापित करें और अब भगवान को धूप, दीप, अक्षत और पीले फूल चढ़ाएं, व्रत कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें। उसके बाद आरती का आचमन करें।

इसके बाद दिनभर निराहार रहें और भगवान का ध्यान करें। मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें। दान पुण्य करें। गायों की देखभाल करें। गोशाला में धन का दान करें।

जो लोग व्रत नहीं कर पा रहे हैं, वे विष्णु जी की पूजा करें, दान-पुण्य करें, मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें। बीमार, गर्भवती और बच्चों के लिए व्रत करना जरूरी नहीं होता है। ये लोग पूजा-पाठ करके भी एकादशी व्रत के समान पुण्य कमा सकते हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें