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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:16 · नई दिल्ली संस्करण

भारतीय-अमेरिकी सैन्य डॉक्टर का कमाल, बिना खोपड़ी खोले की ब्रेन ट्यूमर सर्जरी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारतीय-अमेरिकी सैन्य डॉक्टर का कमाल, बिना खोपड़ी खोले की ब्रेन ट्यूमर सर्जरी

न्यूयॉर्क। भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर जगतकुमार पटेल को बिना खोपड़ी खोले ब्रेन ट्यूमर हटाने की एक नई सर्जरी विकसित करने का श्रेय दिया गया है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं।

पेंटागन के अनुसार, उन्होंने और एक आर्मी न्यूरोसर्जन ने नाक के जरिए खोपड़ी के निचले हिस्से में मौजूद ट्यूमर का ऑपरेशन करने का एक तरीका निकाला।

पटेल ने कहा, "पहले, इनमें से ज्यादातर सर्जरी 'ओपन' तरीके से की जाती थीं, जो मरीज के लिए बहुत मुश्किल प्रक्रिया होती थी।"

उन्होंने कहा, "आज अगर ट्यूमर सही साइज और जगह पर हो तो ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।

नाक के जरिए हमें सबसे अच्छी पहुंच मिलती है और ट्यूमर को पूरी तरह से हटाने में आसानी होगी है।"

हाल ही में, पटेल और लेफ्टिनेंट कर्नल चार्ल्स मिलर ने मरीन स्टाफ सार्जेंट एंडी आर्चर पर यह नई प्रक्रिया सफलतापूर्वक की, जिन्हें 15 साल से गंभीर सिरदर्द की समस्या थी।

जब उन्हें हाल ही में देखने में दिक्कत होने लगी तो डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन किया। इसमें पिट्यूटरी ग्लैंड के सामने गोल्फ बॉल के साइज (4.4 सेंटीमीटर) का एक ट्यूमर मिला, जो ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल रहा था।

उन्हें बेथेस्डा में सेना के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र, वाल्टर रीड आर्मी नेशनल मेडिकल सेंटर लाया गया।

पटेल और मिलर ने नाक के जरिए ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने के लिए इस नई, कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया को चुना।

पेंटागन ने बताया कि पटेल ने नाक की जटिल बनावट से गुजरने और सर्जरी के लिए साफ रास्ता बनाने की योजना बनाई।

पटेल ने एंडोस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल करके सर्जिकल मॉनिटर पर ट्यूमर की हाई-डेफिनिशन, क्लोज-अप तस्वीर दिखाई, जिससे मिलर सुरक्षित रूप से ट्यूमर को काटकर निकाल सके।

पटेल ने कहा, "अगर उन्हें जरूरी हिस्सों तक पहुंचना हो तो मैं कैमरे को और पास ले जा सकता हूं, ताकि उन्हें सब कुछ साफ-साफ दिखे।"

उन्होंने कहा, "नाक के रास्ते जाने में मेरी कुशलता तभी काम की है जब वे (मिलर) इतने कुशल हों कि वहां पहुंचने के बाद ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल सकें।

सर्जरी के दो दिन बाद, आर्चर में ऐसा कोई लक्षण नहीं दिख रहा था कि उनकी अभी-अभी दिमाग की बड़ी सर्जरी हुई हो। वे सर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट में बैठे हुए थे और उनकी नजर भी साफ होने लगी थी।

पटेल ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि डिफेंस हेल्थ एजेंसी में किसी और के पास ऐसी टीम है जो खोपड़ी के निचले हिस्से की इतनी मुश्किल सर्जरी करती हो।"

उन्होंने आगे कहा, "नाक के रास्ते से कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी (मिनिमली इनवेसिव अप्रोच) करना ज्यादा मुश्किल होता है और हमें इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि नाक के रास्ते सर्जरी करने के लिए (ट्यूमर) का एक खास जगह पर होना जरूरी है।"

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