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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:26 · नई दिल्ली संस्करण

भारत दुनिया भर में एआई को अपनाने में सबसे आगे, उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार : रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारत दुनिया भर में एआई को अपनाने में सबसे आगे, उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार : रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी अपने काम में जेनएआई का नियमित उपयोग कर रहे हैं, जबकि 90 प्रतिशत कंपनियां और 86 प्रतिशत कर्मचारी मानते हैं कि एआई से वर्क-प्रोडक्टिविटी बढ़ती है।

'ईवाई 2025 वर्क रीइमेजिन्ड सर्वे' के अनुसार, 75 प्रतिशत कर्मचारी और 72 प्रतिशत कंपनियां मानती हैं कि जेनएआई से बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है, जबकि 82 प्रतिशत कर्मचारी और 92 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि एआई से काम की गुणवत्ता बेहतर होती है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत एआई अपनाने में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। भारत का 'एआई एडवांटेज' स्कोर 53 है, जबकि दुनिया का औसत स्कोर 34 है। यह बताता है कि एआई से कर्मचारियों का कितना समय बच रहा है और काम कितना आसान हो रहा है।

इस सर्वे को, जो अब अपने छठे संस्करण में है, वैश्विक स्तर पर 29 देशों के 15,000 कर्मचारियों और 1,500 कंपनियों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 800 कर्मचारियों और 50 कंपनियों का सर्वे किया गया, जो कि देश में तेजी से बढ़ते एआई के उपयोग को दर्शाती है।

इस सर्वे में भारत का टैलेंट हेल्थ स्कोर 82 रहा, जो सभी देशों में सबसे ज्यादा है। इसका मतलब है कि भारत में कर्मचारी अपने काम के माहौल, वेतन और सीखने के अवसरों से काफी संतुष्ट हैं। वहीं, दुनिया का औसत टैलेंट हेल्थ स्कोर 65 है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 94 प्रतिशत कंपनियां और 89 प्रतिशत कर्मचारी मानते हैं कि भारत में एआई का उपयोग सही और जिम्मेदारी से किया जा रहा है, जिससे लोगों का एआई पर भरोसा बढ़ा है।

हालांकि, 87 प्रतिशत कर्मचारी और 90 प्रतिशत कंपनियां मानती हैं कि नई एआई स्किल्स सीखना जरूरी है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारी साल में 40 घंटे से भी कम समय एआई सीखने में लगाते हैं।

रिपोर्ट कहती है कि जो कर्मचारी एआई सीखने में ज्यादा समय देते हैं, उनमें नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति काफी कम पाई गई है और उनका काम भी ज्यादा बेहतर और गुणवत्तापूर्ण होता है।

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