सऊदी तेल ठिकानों और एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमलों पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हुए हमले, विशेषकर आम नागरिकों और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया जाना, स्वीकार्य नहीं है। भारत ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करते हैं तथा बाब-अल-मंदेब में आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि क्षेत्र में हिंसा बढ़ाने वाली ऐसी कार्रवाइयां न केवल संबंधित देशों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही को भी प्रभावित कर सकती हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब के कई नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हमलों में 73 लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने भी दक्षिणी क्षेत्र में स्थित कई ऊर्जा और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है।
उत्तरी और अधिक आबादी वाले यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों ने हमलों की जिम्मेदारी ली है। हूती समूह के मुताबिक, उसने सीमा के करीब स्थित आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और सरकारी तेल कंपनी अरामको के आभा तथा जिजान स्थित ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी अधिकारियों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, हमलों के कारण कई तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई। कुछ जगहों पर एहतियातन कामकाज भी रोकना पड़ा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ तेल ठिकानों के आसपास आग की लपटें दिखाई दे रही हैं।
हमलों के बाद सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने उनकी एक जेल पर हमला किया, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई। हालांकि, इस दावे को लेकर अलग से विस्तृत पुष्टि सामने नहीं आई है। बताया गया है कि जुलाई में यमन का करीब चार साल पुराना युद्धविराम टूटने के बाद यह हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किया गया सबसे भीषण हमला है। लगातार बढ़ते हमलों से क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।





