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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

पानी की बर्बादी कम करने की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) की नई पहल, विकसित किया गया इनबिल्ट आरओ सिस्टम

धनबाद,। पानी की बढ़ती जरूरत और आरओ सिस्टम से होने वाली पानी की बर्बादी को कम करने की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के रिसर्चर्स ने महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है।

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पानी की बर्बादी कम करने की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) की नई पहल, विकसित किया गया इनबिल्ट आरओ सिस्टम

धनबाद,। पानी की बढ़ती जरूरत और आरओ सिस्टम से होने वाली पानी की बर्बादी को कम करने की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के रिसर्चर्स ने महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है। संस्थान की रिसर्च टीम ने 'इनबिल्ट रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) फिल्टर विद कॉन्सन्ट्रेट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम' विकसित किया है। इस तकनीक को भारतीय पेटेंट भी मिल चुका है। इसका पेटेंट नंबर 593495 और एप्लीकेशन नंबर 202531036943 है। इस पेटेंट के पेटेंटी आईआईटी (आईएसएम) धनबाद हैं।

इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य आरओ प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले रिजेक्ट या कॉन्सन्ट्रेट पानी की बर्बादी को कम करना और उसका दोबारा उपयोग सुनिश्चित करना है। खास बात यह है कि इस सिस्टम को मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में पहले से मौजूद वाटर सप्लाई पाइपलाइन के साथ ही जोड़ा जा सकता है।

सिस्टम में पंप के माध्यम से पानी दबाव के साथ आरओ यूनिट तक पहुंचता है। वहीं, बहुमंजिला इमारत की ऊंचाई के कारण पाइपलाइन में बनने वाला पानी का दबाव भी आरओ फिल्ट्रेशन प्रक्रिया में मदद करता है। आरओ मेम्ब्रेन पानी को दो हिस्सों में बांटती है। एक तरफ साफ पानी प्राप्त होता है, जबकि दूसरी तरफ रिजेक्ट यानी कॉन्सन्ट्रेट पानी निकलता है।

आमतौर पर आरओ सिस्टम से निकलने वाला यह रिजेक्ट पानी नाली में बहकर बर्बाद हो जाता है। लेकिन आईआईटी (आईएसएम) की विकसित तकनीक में इसे दोबारा इस्तेमाल के लिए रूफटॉप टैंक में जमा किया जाता है। बाद में इस पानी का इस्तेमाल सफाई, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कार्यों में किया जा सकता है।

रिसर्च टीम में प्रो. विवेक बाजपेयी, डॉ. पवन कुमार सिंह, डॉ. माधव रतूड़ी और रिसर्च स्कॉलर प्रिंस आनंद शामिल हैं। यह तकनीक खास तौर पर बहुमंजिला इमारतों में पीने के पानी के शुद्धिकरण के साथ-साथ रिजेक्ट पानी के बेहतर प्रबंधन की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।

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