मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:56 · नई दिल्ली संस्करण

I-PAC रेड विवाद: सीएम ममता बनर्जी पर ‘दखलंदाजी’ के आरोप, सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका पर सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
I-PAC रेड विवाद: सीएम ममता बनर्जी पर ‘दखलंदाजी’ के आरोप, सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर तलाशी अभियान के दौरान दखलंदाजी की।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच के सामने होगी।

पिछली सुनवाई के दौरान, ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पश्चिम बंगाल में उसे 'आतंकित' किया गया है।

मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी संघीय एजेंसी की ओर से पेश होते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने उन आरोपों का खंडन किया कि ईडी ने अपनी शक्तियों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है।

वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा द्वारा उठाए गए तर्कों का जवाब देते हुए एएसजी राजू ने कहा, "ईडी का हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इसे आतंकित किया गया है।"

इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च के लिए तय करते हुए, जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में दलीलें पूरी करने के लिए समय दिया था। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि संघीय एजेंसी के एक साथ चल रहे तलाशी अभियानों के दौरान इन लोगों ने उसके कानूनी कर्तव्यों में बाधा डाली।

अपने जवाबी हलफनामे में, मुख्यमंत्री बनर्जी ने दखलंदाजी और बाधा डालने के सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि परिसर में उनकी सीमित मौजूदगी का एकमात्र मकसद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़ा गोपनीय और मालिकाना डेटा वापस लेना था।

हलफनामे के अनुसार, सीएम बनर्जी ने 8 जनवरी को लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर और बिधाननगर स्थित आईपैक के दफ्तर का दौरा किया था। उन्हें यह जानकारी मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल के संवेदनशील राजनीतिक डेटा को खंगाला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह डेटा विधानसभा चुनावों के लिए टीएमसी की रणनीति से बेहद अहम रूप से जुड़ा हुआ था।

हलफनामे में कहा गया है कि जब ममता बनर्जी परिसर में पहुंचीं, तो उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि उन्हें पार्टी का डेटा, जिन डिवाइस में वह स्टोर था, और उसकी प्रिंट कॉपी वाली फाइलें लेने की अनुमति दी जाए।

इसमें आगे दावा किया गया है कि वहां मौजूद प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने इस अनुरोध पर कोई आपत्ति नहीं जताई और उन्हें इनमें से कुछ डिवाइस और फिजिकल फाइलें लेने की अनुमति दे दी।

ऐसा करने के बाद, ममता बनर्जी परिसर से चली गईं, ताकि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

इसमें यह भी कहा गया है कि ईडी के अपने पंचनामों में भी यह दर्ज है कि उसके बाद भी तलाशी जारी रही और यह "शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से की गई।

सीएम बनर्जी ने यह भी तर्क दिया है कि न तो तृणमूल और न ही उसके अधिकारी कथित कोयला घोटाले में आरोपी हैं, और इसलिए, ईडी पार्टी के मालिकाना डेटा पर किसी भी अधिकार का दावा नहीं कर सकती।

जवाबी हलफनामे में ईडी पर दुर्भावनापूर्ण इरादे से काम करने का भी आरोप लगाया गया है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि तलाशी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारी के दौरान और लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद की गई।

इसने इन ऑपरेशनों के समय पर सवाल उठाया है, और दावा किया है कि ये उस समय किए गए जब आईपैक के पास महत्वपूर्ण दस्तावेज थे, जिनमें आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों की प्रस्तावित सूची भी शामिल थी।

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए, हलफनामे में यह भी कहा गया है कि ईडी तलाशी की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग पेश करने में विफल रही। इसमें दावा किया गया है कि तलाशी गुप्त रूप से की गई थी और इसका उद्देश्य गोपनीय राजनीतिक डेटा तक पहुंच बनाना था।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें