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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:37 · नई दिल्ली संस्करण

'जेल या फांसी से नहीं डरती', शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया दावा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
'जेल या फांसी से नहीं डरती', शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया दावा

नई दिल्ली। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि जेल या फांसी का खतरा होने के बावजूद वह स्वदेश लौटेंगी और अदालत का सामना करेंगी। उन्होंने 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में अपनी सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।

78 साल की शेख हसीना ने जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो न्यूज को दिए एक लिखित इंटरव्यू में कहा, "मैं बांग्लादेश लौटूंगी और अदालत में पेश होऊंगी।" हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस अदालत में पेश होंगी।

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "वे मुझे जेल भेज सकते हैं, यहां तक कि फांसी देने की भी कोशिश कर सकते हैं। मुझे इन सभी जोखिमों का पता है।"

बता दें, अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली को लेकर शुरू हुए छात्र आंदोलन के बीच इस्तीफा देकर भारत आने के बाद से पूर्व पीएम हसीना यहीं रह रही हैं।

नवंबर 2025 में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी।

बांग्लादेश सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध किया है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि नई दिल्ली को यह अनुरोध प्राप्त हो गया है और वह इससे जुड़े कानूनी तथा न्यायिक पहलुओं की समीक्षा कर रही है।

इस महीने की शुरुआत में मीडिया में शेख हसीना की संभावित वापसी की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने 14 जुलाई की प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि सरकार हसीना को मुकदमे का सामना कराने के लिए वापस लाने की कोशिश कर रही है और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

बांग्लादेश की पूर्व पीएम ने हत्याओं का ऑर्डर देने वाले आरोप से इनकार किया और दावा किया कि राजनीतिक विरोधियों ने आंदोलन को भ्रमित किया। उन्होंने कहा, "अगर इंडिपेंडेंट विदेशी फोरेंसिक एक्सपर्ट जांच करें कि हर व्यक्ति की मौत (अशांति के दौरान) कैसे और किस हथियार या गोली से हुई, तो भी सच्चाई का पता लगाया जा सकता है।"

2024 में हुई हिंसा के जापानी पीड़ित बांग्लादेश की राजधानी में एक रैपिड रेलवे सिस्टम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इस प्रोजेक्ट में जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी मदद कर रही थी।

इसे लेकर हसीना ने कहा, "एक स्थिर बांग्लादेश सिर्फ बांग्लादेश के लिए ही जरूरी नहीं है। यह दक्षिण एशिया, बंगाल की खाड़ी, विकास साझेदारों और जापान जैसे देशों के लिए भी जरूरी है, जिन्होंने हमारी विकास यात्रा में दोस्ती, भरोसा और रिसोर्स लगाई है।

बांग्लादेश के भविष्य के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा, "देश को ठीक होने की जरूरत है। लेकिन सुलह का मतलब सजा से छूट नहीं हो सकता। अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को सही कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए।"

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