मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:42 · नई दिल्ली संस्करण

कटाव की मार से उजड़े घर, बेबस ग्रामीणों ने खुद तोड़े अपने आशियाने

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कटाव की मार से उजड़े घर, बेबस ग्रामीणों ने खुद तोड़े अपने आशियाने

भागलपुर। जिले के निचले इलाकों में गंगा नदी के भीषण कटाव ने इस वक्त तबाही मचा रखी है। नदी की तेज धार और लगातार हो रहे भू-कटाव के कारण स्थानीय लोगों के बीच भारी दहशत का माहौल है।

पिछले 72 घंटों के भीतर मंदरोनी, इंग्लिश फरका और माशारू गांवों में दर्जनों मकान ताश के पत्तों की तरह ढहकर गंगा नदी में विलीन हो चुके हैं।

हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि जो घर अभी बचे हुए हैं, उन्हें बचाने के लिए लोग खुद ही हथौड़ा उठाकर अपने सपनों के आशियाने को तोड़ने पर मजबूर हैं, ताकि मलबे और कीमती सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके। प्रभावित गांवों से आ रही तस्वीरें बेहद भयावह हैं। कहीं पक्के मकानों की दीवारें भरभराकर नदी की तेज धार में समा रही हैं, तो कहीं लोग बेबसी से अपनी जीवनभर की कमाई को अपनी आंखों के सामने उजड़ता देख रहे हैं। बेघर हो चुकीं महिलाओं की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पेट काटकर, तिनका-तिनका जोड़कर यह घर बनाए थे, लेकिन गंगा की विनाशकारी लहरें सब कुछ लील रही हैं। इस भीषण आपदा के बीच स्थानीय पुरुषों और युवाओं में जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव की भयावहता को देखते हुए प्रशासन द्वारा समय रहते कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। बाढ़ निरोधक कार्य केवल कागजों पर या खानापूर्ति तक सीमित रह गए, जिसके कारण आज स्थिति बेकाबू हो चुकी है।

अस्तित्व के संकट में कई और गांव, पलायन तेजकटाव की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने आसपास के अन्य रिहायशी इलाकों की चिंता भी बढ़ा दी है। अगर जलस्तर में कमी नहीं आई और कटाव को रोकने के लिए तुरंत बड़े पैमाने पर जियो बैग्स या बोल्डर क्रेटिंग का काम शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कई और गांव पूरी तरह से गंगा में समा जाएंगे।

फिलहाल, सैकड़ों परिवार अपने मवेशियों और बचे-खुचे घरेलू सामान के साथ ऊंचे स्थानों, स्कूलों और राष्ट्रीय राजमार्गों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, जहां वे तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें