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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:18 · नई दिल्ली संस्करण

होलिका दहन आज, 700 साल में पहली बार बन रहा शुभ संयोग -चंद्र ग्रहण का भी रहेगा प्रकोप

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
होलिका दहन आज, 700 साल में पहली बार बन रहा शुभ संयोग  -चंद्र ग्रहण का भी रहेगा प्रकोप

होलिका दहन आज, 700 साल में पहली बार बन रहा शुभ संयोग

-चंद्र ग्रहण का भी रहेगा प्रकोप

पटना।बिहार में 24 मार्च को होलिका दहन होगा और 26 को होली खेली जाएगी। इस साल होलिका दहन पर भद्रा का अशुभ काल रात करीब 11:13 बजे तक रहेगा। हालांकि,अलग -अलग शहरों में कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए रात 11:13 बजे बाद होली जलानी चाहिए। वहीं, इस बार होली पर चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन भारत में नहीं दिखने के कारण इसका महत्व नहीं रहेगा। वहीं, इस बार होलिका दहन के वक्त सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मी, पर्वत, केदार, वरिष्ठ, अमला, उभयचरी, सरल और शश महापुरुष योग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि ऐसा शुभ संयोग पिछले 700 सालों में नहीं बना। इन 9 बड़े शुभ योग में होली जलने से परेशानियां और रोग दूर होंगे। ये शुभ योग समृद्धि और सफलतादायक रहेंगे।मालूम हो कि, रंगों का त्योहार होली से पहले होने वाले होलिका दहन के पीछे की बहुत सी पौराणिक कहानियों का उल्लेख मिलता है। पहली प्रह्लाद के अटूट विश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय की जीत की कहानी मिलती है और दूसरी श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ी पौराणिक कथा मिलती है। होलिका दहन की प्रचलित पौराणिक कथा जिनके अनुसार होलिका दहन करने की ये परंपरा शुरू हुई। उसमें कहा गया है कि, हिरण्यकशिपु नाम का एक राक्षस राजा था. दैत्यों के इस राजा ने भगवान ब्रह्मा से अमरता का वरदान प्राप्त किया कि वह न तो दिन में मरेगा और न ही रात में, न तो मनुष्य और न ही जानवर उसे मार सकेंगे। यह वरदान प्राप्त करने के बाद, हिरण्यकश्यपु बहुत अहंकारी हो गया और उसने सभी से उसे भगवान के रूप में पूजा करने की मांग करने लगा उसका एक पुत्र था प्रह्लाद। उसका पुत्र प्रह्लाद जन्म से ही अपने पिता के बजाय भगवान विष्णु के प्रति भक्ति रखता था और उन्हीं की पूजा-अर्चना करता था। राजा हिरण्यकशिपु को उसकी भगवान विष्णु के प्रति भक्ति पसंद नहीं थी और वो अपने पुत्र से बहुत क्रोधित रहता था। हिरण्यकश्यपु ने उसे मरवाने के कई प्रयास किए और उसे बहुत सी यातनाएं भी दीं लेकिन फिर भी प्रह्लाद बच गया।

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