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मालेगांव ब्लास्ट पर आया ऐतिहासिक फैसला : सत्य की जीत और कांग्रेस की 'भगवा आतंक' साजिश की करारी हार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
मालेगांव ब्लास्ट पर आया ऐतिहासिक फैसला : सत्य की जीत और कांग्रेस की 'भगवा आतंक' साजिश की करारी हार

मालेगांव ब्लास्ट पर आया ऐतिहासिक फैसला : सत्य की जीत और कांग्रेस की 'भगवा आतंक' साजिश की करारी हार

जयपुर, 31 जुलाई 2025 — मालेगांव ब्लास्ट केस में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय ने न केवल सात निर्दोषों को वर्षों बाद न्याय दिलाया है, बल्कि उस राजनीतिक साजिश को भी बेनकाब कर दिया है जिसे कांग्रेस ने 'भगवा आतंकवाद' और 'हिंदू टेरर' का नाम देकर देश की सबसे सहिष्णु सभ्यता पर कलंक लगाने की कोशिश की थी। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने इस फैसले को सत्य की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कांग्रेस की धार्मिक द्वेष नीति पर तीखा प्रहार किया।

मदन राठौड़ ने दो टूक शब्दों में कहा कि मालेगांव विस्फोट एक जघन्य घटना थी, लेकिन उससे भी बड़ी त्रासदी यह रही कि कांग्रेस ने सत्ता के लोभ में इसे 'हिंदू आतंकवाद' का चेहरा देने की साजिश रची। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे राष्ट्रभक्तों को एक पुरानी मोटरसाइकिल के आधार पर झूठे मुकदमों में फंसाया गया। जांच एजेंसियों पर दबाव डालकर मनगढ़ंत चार्जशीट तैयार की गई, झूठे गवाह बनाए गए, और मीडिया ट्रायल के ज़रिए पूरे हिंदू समाज को आतंक से जोड़ने की साजिश की गई।

राठौड़ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं — सुशील कुमार शिंदे, दिग्विजय सिंह और पी. चिदंबरम — को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन नेताओं ने 'भगवा आतंक' जैसे अपमानजनक और विभाजनकारी शब्दों का प्रयोग कर न केवल देशवासियों की भावनाओं को आहत किया, बल्कि विश्व पटल पर हिंदू संस्कृति की छवि को धूमिल करने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टिकरण और हिंदू विरोध का माहौल खड़ा करना था।

मदन राठौड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए उस ऐतिहासिक बयान को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था — "हिंदू कभी आतंकवादी हो ही नहीं सकता।" राठौड़ ने कहा कि आज न्यायालय के इस फैसले ने उस कथन को न्यायिक रूप से प्रमाणित कर दिया है। यह निर्णय न केवल निर्दोषों की रिहाई है, बल्कि हिंदू समाज की अहिंसक, सहिष्णु और विश्व-कल्याणकारी परंपरा की पुनर्स्थापना भी है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की "भगवा आतंक" थ्योरी दरअसल एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा था, जो हिन्दू समाज को सांप्रदायिक बताकर विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया। लेकिन सत्य की अदालत में वह झूठ दम तोड़ गया।

राठौड़ ने समस्त देशवासियों से अपील की कि इस ऐतिहासिक निर्णय को संयम, श्रद्धा और आत्मगौरव के साथ स्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा, "यह फैसला केवल सात व्यक्तियों की मुक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था, संस्कृति और जीवन मूल्यों की पुनर्पुष्टि है। कांग्रेस ने झूठ की नींव पर राजनीति खड़ी की थी, लेकिन सत्य के सामने वह महल ताश की तरह ढह गया।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में भाजपा देश के हर नागरिक को न्याय और सम्मान दिलाने के अपने संकल्प पर अडिग रहेगी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी भी धर्म या संस्कृति को निशाना बनाने की हर साजिश का खुला विरोध करेगी।

यह रिपोर्ट अदालती फैसले की खबर नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा, सनातन संस्कृति और सत्यनिष्ठ न्याय प्रणाली की विजयगाथा है

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