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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली में सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक ‘श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव 2025’, सिद्धगुरुवर श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति में गूंजा श्रद्धा, भक्ति और चेतना का महासंगम

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
दिल्ली में सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक ‘श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव 2025’, सिद्धगुरुवर श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति में गूंजा श्रद्धा, भक्ति और चेतना का महासंगम

दिल्ली में सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक ‘श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव 2025’, सिद्धगुरुवर श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति में गूंजा श्रद्धा, भक्ति और चेतना का महासंगम

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2025 — दिल्ली का तालकटोरा इंडोर स्टेडियम आज एक दुर्लभ, दिव्य और भव्य आध्यात्मिक संगम का साक्षी बना, जहाँ ‘श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव 2025’ का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। विश्व धर्म चेतना मंच–दिल्ली एवं एनसीआर के तत्वावधान में और श्री सिद्धेश्वर तीर्थ ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति के सौजन्य से आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में हजारों श्रद्धालु, साधक, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शोभा सिद्धगुरुवर श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति से और भी बढ़ गई, जिनके उद्बोधनों ने जनमानस के अंतर्मन को झंकृत कर दिया।

सिद्धगुरुवर ने अपने गूढ़ और ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि “गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मजागरण और चेतना के पुनर्जागरण का पावन अवसर है। आज संसार को धर्म से नहीं, बल्कि धर्म की चेतना से जोड़ने की आवश्यकता है। गुरु वह दीप हैं जो अज्ञान के अंधकार को काटकर शिष्य के भीतर परमात्मा की ज्योति जलाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रत्येक शिष्य आत्मनिर्भर, आत्मजाग्रत और समाज के लिए उपयोगी बने – यही उनका संकल्प है।

गुरुदेव ने मानवता को संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक युग भले ही विज्ञान और तकनीक का हो, परंतु यदि विवेक, संतुलन और आध्यात्मिकता न हो तो यह विकास अधूरा रह जाएगा। भारत की गुरु परंपरा इस आध्यात्मिक संतुलन की आधारशिला है, जिसे संरक्षित रखना हर भारतीय का कर्तव्य है।

कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने गुरुदेव को युगद्रष्टा बताते हुए कहा कि उनकी साधना और वैदिक ज्ञान के माध्यम से भारत ही नहीं, विश्व को शांति और चेतना का संदेश मिला है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि गुरुदेव सनातन धर्म की चेतना के प्रवर्तक हैं और उन्होंने धर्म के साथ-साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुदेव के सान्निध्य को “ईश्वरीय अनुभूति” बताते हुए कहा कि यह कोई साधारण अनुभव नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई से उठता प्रकाश है।

इस भव्य आयोजन में सांसद मुकेश दलाल (सूरत), ज्ञानेश्वर पाटिल (बुरहानपुर), मनोज तिवारी (उत्तर-पूर्वी दिल्ली), बांसुरी स्वराज, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, उद्योगपति अजय गुप्ता, हेमंत परावरी, पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, ओलंपियन मुक्केबाज विजेंदर सिंह सहित कई राज्यों से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी, शिक्षाविद, कलाकार, और समाजसेवी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन व आयोजन गुरुदेव की शिष्या श्रीमती सरला बोथरा (ग्लोबल महिला चेयरपर्सन, आश्रम) की प्रेरणा से सफलतापूर्वक हुआ। दिल्ली शाखा अध्यक्ष एस.एन. चांडक, नोएडा शाखा अध्यक्ष जेठमल मेहता, हरियाणा अध्यक्ष संजय शर्मा सहित कई समर्पित गुरुभक्तों की भूमिका सराहनीय रही।

महोत्सव के समापन पर पं. श्री श्रीनिवास श्रीमाली द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच गुरु पाद पूजन हुआ, जहाँ श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाली दिव्यता, शांति और भक्ति से सराबोर रहा। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना, बल्कि समाज में धर्म चेतना के नवसंचार का भी सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। भारत की गुरु परंपरा आज भी जीवंत है, जाग्रत है और विश्व को मार्ग दिखाने की क्षमता रखती है। 'श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव 2025' ने श्रद्धालुओं के हृदय में वह लौ जला दी है, जो अब जीवन भर जलती रहेगी – सेवा, साधना और सत्य की लौ।

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