खुशख़बरी! भारतीय रेलवे के लिए मोदी कैबिनेट द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले से अब त्योहारों में नहीं अटकेगा सफर

केंद्रीय कैबिनेट ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। ट्रेनों की आवाजाही और फ़्रीक्वेंसी को बेहतर बनाने के लिए, कैबिनेट ने 4-लेन वाले रूट बनाने को मंज़ूरी दी है। इस योजना के तहत 7 नए प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है, जो अलग-अलग रूट पर चलेंगे—यानी सात रूट को 4-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। दिल्ली-मुंबई रूट को भी 4-लेन बनाने की मंज़ूरी मिल गई है। भारतीय रेलवे के अनुसार, ज़्यादा भीड़-भाड़ की वजह से इन रूट को चार लेन का किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ़ यात्रियों की आवाजाही बेहतर होगी, बल्कि तेज़ कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित होगी।
4-लेन में विस्तार से ट्रेनों के देर से चलने की संभावना कम होगी और पहले के मुकाबले ज़्यादा ट्रेनें चल पाएँगी। इससे त्योहारों के दौरान घर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगर हम सबसे अहम रेलवे कॉरिडोर पर नज़र डालें, तो 11,000 किलोमीटर में फैले 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं। इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को 4-लेन रूट में बदला जा रहा है और कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है। आने वाले सालों में ये भारी ट्रैफिक संभालेंगे। 'गोल्डन क्वाड्रिलैटरल'—जो दिल्ली को मुंबई, मुंबई को चेन्नई, चेन्नई को कोलकाता और कोलकाता को मुंबई से जोड़ता है—इन 7 कॉरिडोर के साथ मिलकर कुल रेलवे ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा संभालता है।
इन कॉरिडोर में से लगभग 2,000 किलोमीटर का विस्तार पहले ही 4-लेन में किया जा चुका है। लगभग 5,000 किलोमीटर के लिए काम चल रहा है या उसे मंज़ूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी 4,000 किलोमीटर का काम मंज़ूरी मिलने की आखिरी प्रक्रिया में है। 4-लेन प्रोजेक्ट के अलावा, कैबिनेट ने 5 राज्यों के 14 ज़िलों में फैले 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी। इस प्रोजेक्ट से भारतीय रेलवे नेटवर्क का लगभग 656 किलोमीटर तक विस्तार होगा; इसकी अनुमानित लागत ₹10,783 करोड़ है और इसे पूरा करने का लक्ष्य 2029–30 रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 ज़िलों में 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 540 किलोमीटर बढ़ जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत ₹10,021 करोड़ है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है।





