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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:54 · नई दिल्ली संस्करण

गणतंत्र दिवस पर स्वदेशी लाइट फील्ड गन से ऐतिहासिक 21 तोपों की सलामी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
गणतंत्र दिवस पर स्वदेशी लाइट फील्ड गन से ऐतिहासिक 21 तोपों की सलामी

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। इस परंपरा के तहत गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यह भारत में ही बनी एक पूर्णत स्वदेशी तोप प्रणाली है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है। पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 105 मिमी लाइट फील्ड गन के प्रयोग से न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला है, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के सशक्त होने का संदेश गया है।

यह स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर भारतीय सेना के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिया जाने वाला 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है। भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का प्रत्येक क्षण अत्यंत अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है।

दरअसल 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) भारतीय सेना की एक प्रतिष्ठित आर्टिलरी बैटरी है।

यह यूनिट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तैनात है। यह बैटरी देश के सर्वोच्च एवं गरिमामय राष्ट्रीय अवसरों पर तोपों की सलामी देने की परंपरा का निर्वहन करती है। जिन विशेष अवसरों पर यह यूनिट तोपों की सलामी देती है उनमें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ, शहीद दिवस पर राजघाट, स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला तथा राष्ट्रपति भवन में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों एवं सरकार प्रमुखों के औपचारिक स्वागत के समारोह शामिल हैं।

1721 फील्ड बैटरी, 172 फील्ड रेजिमेंट का अभिन्न अंग है, जो पूर्व में 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के अधीन रही है।

सलामी के लिए भारतीय तोपों का इस्तेमाल एक ऐतिहासिक परिवर्तन रहा है। इसके तहत सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी के लिए सेना 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग कर रही है। यह पूरी तरह से भारतीय तोप प्रणाली है। यह रक्षा निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को प्रदर्शित करती है। कुछ साल पहले तक ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों से सलामी दी जाती थी, लेकिन अब इसका स्थान आधुनिक भारतीय तोप ने ले लिया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।

तोपों की फायरिंग तीन समकालिक क्रियाओं के साथ पूरी तरह से समन्वित रहती है। इसमें प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का आरोहण, सेवा बैंड द्वारा राष्ट्रीय गान का वादन तथा प्रेसिडेंट्स बॉडी गार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी शामिल है। सेना का मानना है कि 105 मिमी लाइट फील्ड गन की गूंज के साथ दी जाने वाली यह 21 तोपों की सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त छवि को भी राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है।

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